पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/८९

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पहम्मद कासिम सा (वदोक्सानी)--पहम्मद कुलो खां 'पर्यन्त इनका राज्य फैल गया । धन और जनको भो , पक्ष छोड़ कर चागताई सामान्तों के दलमें मिल गपे। इन्हें कमी न थी। स्वयं गजनीपति ताज उद्दीन मलयुदने । पोडे शमसुद्दीन आत्गाके पक्षमें रह कर न्होंने राम इन पर दो बार चढाई की। किन्तु दोनों ही वार हार मा खांको परास्त किया। इस युद्धजपके पारितोषिकसाप फर उन्हें लौटना पड़ा था। १२२५३ में दिल्लीफे राजा इन्हें मूलतान प्रदेश जागीरमें मिला। शमसुहोन अल्तमसने इन पर चढ़ाई करने के लिये ससैन्य अनन्तर फासिम मालपान्तर्गत शारङ्गपुर गपे । कदम पढ़ाया | महम्मद इस सम्यादको सुनते हो बहु- यहाँ अकयरसे गमको भेर दुई। अब दोनों मिल कर मूल्य रत्न तथा स्त्री पुत्र साथ ले नावसे भाग गपे । देय भवदुल पा उजयकको फैद करने चल दिये । इसके कुछ संयोगसे नाय हूब गई जिससे सोको अपने जीवनसे दिन ही वाद शाहपुरमें इनकी मृत्यु हुई। दाय धोना पड़ा था। महम्मद कामिम पा (मोर मतिर)-पक मुगल समा. महम्मद कासिम खां (बदाक्सानी )-एक मुसलमान पति। सम्राट शाहजहांके राजत्यकाल में ये सेनाध्यक्ष, 'कयि । यह मुगल बादशाह अकबर तथा हुमायू'फे तोपसाने दारोगा भौर कोराल पद पर नियुक्त थे। शासनकालमें उनके अधीन नौकरी करने थे। इन्होंने याहिक तथा मान्यग्बुदके युद्ध में इन्होंने अपनी वीरता जोसेफ तथा पोतिफाकी प्रेम काहिनी स्वरचित् युमुफ दिखा कर मुनानिद पी और आग्रता येगीको उपाधि जेलेखा नामक काव्यमें वर्णन को है । १५३१ ६० | पाई गो। युवराज मोरङ्गजेवको कन्दवार चढाई करगे. भागरानगर में इनकी मृत्यु हुई। में ये चार हजार पदातिक और दाई हजार मण्यारोही महम्मद कासिम खां ( मोर )-यङ्ग श्यर मिर्जाफरफे : सेना अध्यक्ष बनाये गये थे। पीछे इन्होंने धीनगर जमाई। सिराजुद्दीला जव भगवानगोलाको ओर भाग राजके सान्तुर दुर्गको जीत कर तहस नहस कर डाला। रहे थे उस समय इन्होंने उन पर चढ़ाई कर दी और युवराज दाराशिकोहने इन्हें ५ हजार भत्र्यारोधियों उनको प्रियतमा स्त्री लुत्फ उन्निसाके अलद्धरादि छोन तथा ५००० पदातिकका अध्यक्ष बनाया था। इसके ‘फर नौ दो ग्यारह हुप। मोरकासिम देखो। बाद इन्होंने गुजरातका शासक पद और एक लान म. महम्द कासिम सां-निशापुरफे एफ धनाढय जमींदार भी पारितोषिकमें पापा। ये मीरगजेवफ पियस धारा- उसयक जातिके माममणकालमें ये अपनी जग्मभूमिका सिकोहकी ओरसे समगड़ युद्ध में लड़े थे। परन्तु मरत. त्याग कर भारतय भाये । यहां घेराम पांके मघोन में मारहजेवसे हार पा कर माफी मांगनी पड़ी थी। सेनानायक के पद पर नियुक्त हुए । सिकन्दवर शूरके औरङ्गजेयने इन्हें मथुराका शामक बना कर मेला | पर विरुद्ध युद्ध में इन्होंने अच्छी ख्याति पाई थी। पीछे तैमूर। राहमें इनके भाईसे ही इनका प्राणनाश हुमा। के साथ जो युद्ध हुमा उसमें ऐं पान जमानके अधीन महम्नद कासिम ( मोर )-एक मुसलमान ऐतिहासिक 'हरायल' बन कर गये थे। इसके कुछ समय बाद अर्यान्) इन्होंने नादिर शाहके भारत माक्रमण कर 'इमाननामा' सम्राट् मकवरफे राजत्यकालके प्रथम वर्ष में इन्होंने ' नामसे पफ इतिहास लिया। मेयाइराज राणा उदयसिंहफे गनु हासो पांफे विपद महम्मद कासिम (मैपद)--शाम-योसियो गामक उ सुख-यात्रा कर यो। मुगल पिद्धपी शेर सांके सेना- धणे प्रणेता। वागदापासी यिष्यात मुमतममान- पति घोरवर दाजी पाने उन राणाको परास्त कर नगर साधु मादुल कादिर शिलानीफे सम्बाध हो यद यथा अजमेर पर अधिकार कर लिया। मुगलसेना जव लिग गया है। दानापुरमे १८५५०को उन्होंने उक्त प्रय दाजी प्राको दमन करने गई तब पे जान ले कर गुजरात समाम किया था। भागे। इसी समय महम्मद कासिममे नगर तथा मन- महम्मद कुली गां-नादावादफ एक मुसलमान शासक, मेरको जीत कर मुगल साम्राज्य में मिला लिया। अयोध्या नगाव सरदरमा माई मिा महनीम बादशाहके शासनकालये पाच वर्ष में पे पेरामा पुर। १७ में इन्दन गुपरा मलि गोदर (पछि