पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/९३

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पहम्मद खां वलपुर (मीर)-पहम्मद खां बनस (नवार) उलमुल्कको, सेना भयभीत हो गई और निकटयत्ती । कर इन्हें अपना मित बना लिया। जहांगीरने दाक्षि- पहाड़ों जा छिपी। गुजराती सेनामोंको यह मालूम : णात्य विजयके समय इन्हें अपना प्रधान. सेनानायक ..होने पर उन्होंने फौरन पहाडको, चारों ओरसे घेर लिया बनाया था। पफिफे युदमें मालिक अम्बरको हराकर तथा बढ़ी, निर्दयतासे उन्हें मार डाला। इस युद्धौ । ये सनाटके विशेष प्रियपात हो गये थे। पद होने पर • दक्षिणी सैन्यदलको विशेष क्षति हुई थी। भी इन्होंने युद्धसे मुंह नदों मोड़ा। १०७६०में ये सदा. .. अमन्तर सन्धि होने के बाद भी निजाम उल-मुल्कने के लिये चल बसे। • सम्धि-नियमोंको तोड़ दिया। इस पर १५२८ में, यह एक साधुचेता व्यक्ति थे। दोन दुतियों के ऊपर महम्मद ,सांने अपने मामाके साथ दक्षिणदेशको और इसकी पिशेप पा रहती थी। रात मौर दिनमें पे फेथल यात्रा कर दी। इस समय दोनों दलके दुर्गके पास हो काम करते थे, दिनमें धर्म कर्म । कुरान पाठ और पहुंचने पर यहाँफे राजा वागलाना याहरजी सुल्तान- भोजन तथा रातमें निद्रा यापन | इसके सिया भीर का स्वागत करनेके लिये आगे बढ़े। पीछे उन्होंने सुल- किसी भी कामको योर इनका ध्यान नहीं था। दिन में जब सान और उनके भांजे महमद atको अपनी दो बहन | तक ये 'युजू' उपहार न २ लेते तब तक भग्नप्रहण नहीं समर्पण कर उनसे मेल कर लिया। करते थे। धर्मात्मा साधुको तरह जीयन बिताते दे इसके बाद अपने मामा साप पे युनिपुर-युदौ । लोग इन्हें फकीर कहा करते थे। दरिद्रकी सेवा करना .मालया तथा मापदुदुर्ग विजय करनेको चल पड़े। १५३२ तो इनका जीया प्रत दी था। • मे. इन्होंने सुस्तानसे छुट्टी ली। सुल्तानने इन्हें दक्षिण-प्रदेशको यात्रामें इन्हें अधिक काल उधर ही

महम्मदशाहको उपाधिसे भूपित किया था। । विताना पड़ेगा इलिपे पा जिलान्तर्गत भाष्टि

महम्मद खां तलपुर (मीर)-सिन्धुपदेशके एक राज्य विभाग इन्हें बादशाहको भोरसे जागीरस्वकर मिला। ध्युत अमीर। ये सलपुरके मोरवंशीय पफ मन्तिम । इन्होंने यहां अपना यासभयन वयापा भीर अनेकों .विण्यात राजा थे। सिन्धविजयके वाद मप्रेजोने इन्हें प्रासाद, मसजिद तथा उद्यानयाटिकामोंसे नगरका सौन्दर्य

मजरवन्द किया । पर्याप्रदेशको व्यवस्थापिका समाफे' बढ़ा दिया। अभी यह स्थान जनधान्य भौर उगाइ-सा

.सदस्य हो कर इन्होंने कई अच्छे अच्छे काम किये। हो गया है। . १८७० ईमें इंदररावादमें इनकी मृत्यु हुई। इस समय इनकी मृत्यु सी माधि नगरमें हुई। पहले इनके मक इनकी अयस्था ६० वर्षको यो। दरमें बहुतेरे मुसलमान नमाज पढ़ने जाया करते थे। महम्मद् पां धारी-सम्राट अकबर शाहके पक सभासद इनको मृत्युके बाद शाहजहोंने इनके सड़फ मापद पांको तथा प्रसिद्ध गायक। दाई हजारोके पद पर नियुक्त किया। महम्मद सां नियाजो-पक मुगल सेनापति । सघाट महम्मद वां (मीर)-पंजावफे मुसलमान शासका मकबरन इन्५०० सेनामों का नायक बनाया। परन्त सम्राट अकयर तथा मायके भनुप्रहसं बहुत दिनों तक जहांगोरकै समयमें से दो हजारों पद तक पहुंच गये पंजावफे शासक रदं । १५७५ १०में इनकी मृत्य। इनने शादराज पांके साथ पहाल पर चढ़ाई कर दी और अपने प्रशासन काल में ये पारसो तथा तुकी मापा को प्रसपुस युद्ध में अपनी योरताका अच्छा परिचय दिया। दोपान' लिप गये हैं। इनको जन्मभूमि समोमें थी, शाद्वाजने इन्हें काम पर नियुक्त रसने लिये प्रति वर्ष इस कारण सोग इन्हें गजनी कपि कदा करने । धान १ लाख २० देनका पचन दिया था। पश्चात् माननानाके उन्मान मामा' नामक सुझो सम्प्रदायका पन्हा साथ इन्होंने ठहयुरमे मित्रां जानी येगकी मार कर का बनाया दुमा है। ऐसां कलानके नाम भी मश. युद्ध में विजय प्राप्त की थी। . बानम्मानाने इनको योरता तथा प्रतिभा पर मुग्ध हो . महम्मद सा रस (मयाव)--एक रोहिला सदा, या Yol X1112