पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/२४८

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२१२ भारतीय हैड यूनियन कांमेस

अपना जीवन अर्पण कर दे 1 यह सस्था सर्व वैध तथा शान्तिमय उपायों द्वारा भारत की हित-वृद्धि के प्रयत्न को अपना लक्ष्य मानती है । समिति का प्रधान कार्यालय पूना में है । बम्बई, भदरास, प्रयाग और नागपुर में इसकी शाखाएं तथा कालीकट, मेंगलोर, लखनऊ, लाहौर और कटक में त्-मंकी, उप-शाखाएँ हैं । इसके प्रत्येक सदस्य को, प्रवेश के अनन्तर, अध्ययन-बनास के लिये तीन वर्ष तक पूना में और दो साल तक अन्य स्थानो में अस्थायी रूप से रहना पड़ता है । प्रत्येक सदस्य 'कों प्रतिज्ञा करनी पलती है कि देश ही का स्थान उसके हृदय में सदैव प्रथम रहेगा । यह सम्प्रदाय अथवा अन्य निम्न विचार का त्यागकर भारतवासी मात्र की सेवा वधुभाव से करेगा 1

स्वर्गीय श्री गोखले इस सस्था दे; प्रथम प्रधान हुए । उपरान्त भहामानमीय श्री१नेवास शाली और उनके बाद भी गोपालराव के० देवधर अध्यक्ष चुने गये । आजकल माननीय प० हृदयनाथ कुंज्जरू इसके अध्यक्ष हैं । पडित कुंजरू इस सस्था की एक ऐसी देन हैं, जिस पर देश समुचित रूप से गर्व कर सकता है । सहकारी-समि-देयों के आन्दोलन, दुर्भिक्ष और प्रकोप-पीडितों की सहायता, मजदूर-सगठन (आंशिक ), ग्राम-सुधार (आद्गशेक), साक्षरता- प्रसार, दलित जातियों का उत्थान, आदि कार्यों में इसके सदस्य भाग लेते हैं । इस संस्था के ३ ० सदस्य हैं । इसके सदस्यों को ग्रेजुएट होना आवश्यक है, और उन्हें जहाँ मासिक वृति मिलती है 1 इस सस्था के नियत्रण में 'हितवाद' ( अँनंरिब्रो ), "ज्ञानंप्रकाशां ( मराठी ) तथा 'स९ष्टि आकू इंडिया' पत्र प्रकाशित होते हैं, जो सस्था के उद्देरुयों के प्रचार में वडा योंग देते है । समिति के सदस्य राजनीति से अलग-थलग रहते हैं । सांमेति की राजनीति (प्रारम्भ-काल से ही नाम-दली रहीं है ।

भारतीय दूँड यूनियन काग्रेस-भारत में सबसे पहले श्री नारायण, मेघजी लोखग्रेहे ने बम्बई में सन् १८९० में मजदूर-' की स्थापना की 1 उनहोंने 'दीनबन्धु' नामक एक समाचार-पत्र भी निकाला । अनेक वर्षों तक सबों से मख्वादृदु सदस्यों की सख्या में वृद्धि नहीं हुई । सन् १९१ ० में दूसरा मज़दृहुं मृघ कायम हुआ । सत् १८८१ में पहला भारतीय कारखानस्कश्वनून बना था । सन् १८९१ में इसमें सशोघन किया गया । सन् १९११ मे, कारखाना-मंजूर कभी-