पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/३५९

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


विशेषाधिकार ३ १ के

. ५ ॰ , हु. / दिलचस्पी रखती है, किन्तु वहीं की सरकंरैंरी जीति इसहुँम्बकंध ये तटस्थ रहने की ही है । फरवरी-मार्च १९४३ के महात्मा गान्धी के २१ दिन के व्रत के समय मि० फिलिप्स ने वर्तमान भारतीय समस्या के हल के लिये कुछ दिलचस्पी दिखाई थी, किन्तु सरकारी तौर पर अमरीका से इसके विपरीत संवाद मिला । आपसे पूर्व कर्मल लुई जान्सन भारत मे० इस स्थिति मे, रहते रहे हैं । विलहुँलमुँरेंन्दना, नीदरतैदूत्त की रानी----: १ अगस्त १८८० को पैदा हुई-, १८९० में गहो पर बैठी; प्रित हैनरी से (जो १९३४ में मर गया) विवाह किया; शहजादी जूलियाना ( जिसने प्रिन्स बरनार्ड से शादी की है ) विजू हेलूमिना की उत्तराधिकारिणी पुत्री है 1 १० मई १९४० को जब जर्मनी ने हातैन्ड पर आक्रमण किया तो विरुहुँलमुंमेना ने उसका मुकाबला किया, किंतु जर्मन-सेनाएँ, विश्वाख्यातियों की सहायता से, जब राजधानी हेग में दाखिल होगई तो रानी राजपरिवार सहित हँगतैन्ड को चलीगई । विरीशाधिकार ( जिमं०1१७ष्टि१1०11प्त प्र-वह सां-धियो" जिनके अनुसार किसी देश ( विशेषकर सामा१त्यवादियों द्वारा अपहस्ति ) में विदेशी अथवा शासक आते के नागरिको को, उस देश मे प्रचलित कानून से अलग, नाग- रिक-अधिकार प्राप्त हों । योरोंषेयन और अमरीकी राष्ट] ने इस प्रकार की सांन्तियों तुकों, फारस तथा अन्य मुसलिम देशो, चीन ओंर दूसरे एशियाई तथा अमरिकी देशों से प्राप्त की । इन सां३धयो के अनुसार इन देशों में रहने- वाले योरोंषेयनों और अमरीकन. को हकृ हासिल था कि उनके विरुद्ध चलने- वाले मुकदमो की सुनवाई उनके अपने देशवासियों द्वारा बनाई गई अदालतों में हो । यह विशेषाधिकार-सां-कयों बहुत पुराने समय, नबी रातान्दि; से होती चली आई है । वर्तमान युग मे, आहरित और पराधीन देशों में रारुट्टीय- स्वाधीनता का जापारण आरम्भ होने से, इन अपमानजनक विशेषाधिकारों के प्रति, होम उत्पन्न हुआ और अब यह सन्धियों रद की जा रहीं हैं । तुकों ने, १९२३ की लौसेन की सत्-धि भी इनका अन्त कर दिया; फारस ने १९२८ में स्याम ने १९३६ में और मिल मे, १५ अक्टूबर है ३ ७ की गोत्नेथयो-सोधि में, इन विशेषाधिकारों का खात्मा तो नहीं हुआ, यह तय हुआ कि आगामी बारह वर्षों तक, विशेष प्रकार के मामलों मे, सम्मिलित अदालतें जैठतीरधिगी । चीन