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शिक्षा


हमारे अच्छेसे अच्छे विचार प्रगट[१] करनेका ज़रिया है अंग्रेजी; हमारी कांग्रेसका कारोबार भी अंग्रेजीमें चलता है। अगर ऐसा लंबे अरसे तक चला, तो मेरा मानना है कि आनेवाली पीढ़ी हमारा तिरस्कार करेगी और उसका शाप[२] हमारी आत्माको लगेगा।

आपको समझना चाहिये कि अंग्रेजी शिक्षा लेकर हमने अपने राष्ट्रको गुलाम बनाया है। अंग्रेजी शिक्षासे दंभ,[३] राग,[४] जुल्म वगैरा बढे़ हैं। अंग्रेजी शिक्षा पाये हुए लोगोंने प्रजाको ठगनेमें, उसे परेशान करनेमें कुछ भी उठा नहीं रखा है। अब अगर हम अंग्रेजी शिक्षा पाये हुए लोग उसके लिए कुछ करते हैं, तो उसका हम पर जो क़र्ज चढ़ा हुआ है उसका कुछ हिस्सा ही हम अदा करते हैं।

यह क्या कम जुल्मकी बात है कि अपने देशमें अगर मुझे इन्साफ़ पाना हो, तो मुझे अंग्रेजी भाषाका उपयोग करना चाहिये! बैरिस्टर होने पर मैं स्वभाषामें बोल ही नहीं सकता! दूसरे आदमीको मेरे लिए तरजुमा कर देना चाहिये! यह कुछ कम दंभ है? यह गुलामीकी हद नहीं तो और क्या है? इसमें मैं अंग्रेजोंका दोष निकालूँ या अपना? हिन्दुस्तानको गुलाम बनानेवाले तो हम अंग्रेजी जाननेवाले लोग ही हैं। राष्ट्रकी हाय अंग्रेजों पर नहीं पड़ेगी, बल्कि हम पर पड़ेगी।

लेकिन मैंने आपसे कहा कि मेरा जवाब 'हाँ' और 'ना' दोनों है। ‘हाँ' कैसे सो मैंने आपको समझाया।

अब 'ना' कैसे यह बताता हूँ। हम सभ्यताके रोगमें ऐसे फँस गये हैं कि अंग्रेजी शिक्षा बिलकुल लिये बिना अपना काम चला सकें ऐसा समय अब नहीं रहा। जिसने वह शिक्षा पाई है, वह उसका अच्छा उपयोग करे। अंग्रेजोंके साथके व्यवहारमें, ऐसे हिन्दुस्तानियोंके साथके व्यवहारमें जिनकी भाषा हम समझ न सकते हों और अंग्रेज खुद अपनी सभ्यतासे कैसे परेशान हो गये हैं यह समझनेके लिए अंग्रेजीका उपयोग किया जाय। जो लोग अंग्रेजी पढ़े हुए हैं उनकी संतानोंको पहले तो नीति सिखानी चाहिये,उनकी मातृभाषा[५] सिखानी चाहिये और हिन्दुस्तानकी एक दूसरी भाषा सिखानी चाहिये। बालक


  1. ज़ाहिर।
  2. बद्दुआ।
  3. ढोंग।
  4. ममता, द्वेष।
  5. मादरी जबान।