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हिन्द स्वराज्य


देशसे जो धन ले गये, वह भले आपने हजम कर लिया। लेकिन अब आगे आपका ऐसा करना हमें पसन्द नहीं होगा। आप हिन्दुस्तानमें सिपाहगिरी करना चाहें तो रह सकते हैं। हमारे साथ व्यापार करनेका लालच आपको छोड़ना होगा। जिस सभ्यताकी आप हिमायत करते हैं, उसे हम नुकसानदेह मानते हैं। अपनी सभ्यताको हम आपकी सभ्यतासे कहीं ज्यादा ऊंची समझते हैं। आपको भी ऐसा लगे तो उसमें आपका लाभ ही है। लेकिन ऐसा न लगे तो भी आपको, आपकी कहावतके[१] मुताबिक, हमारे देशमें हिन्दुस्तानी होकर रहना होगा। आपको ऐसा कुछ नहीं करना चाहिये, जिससे हमारे धर्मको बाधा पहुँचे। राजकर्ता होनेके नाते आपका फ़र्ज है कि हिन्दुओंकी भावनाका आदर करनेके लिए आप गायका मांस खाना छोड़ दें और मुसलमानोके खातिर बुरे जानवर- (सूअर)का मांस खाना छोड़ दें। हम दब गये थे इसलिए बोल नहीं सके, लेकिन आप ऐसा न समझें कि आपके इस बरतावसे हमारी भावनाओंको चोट नहीं पहुँची है। हम स्वार्थ या दूसरे भयसे आज तक कह नहीं सके, लेकिन अब यह कहना हमारा फ़र्ज हो गया है। हम मानते हैं कि आपकी क़ायम की हुई शालाएं और अदालतें हमारे किसी कामकी नहीं हैं। उनके बजाय हमारी पुरानी असली शालाएँ और अदालतें ही हमें चाहिये।

हिन्दुस्तानकी आम भाषा अंग्रेजी नहीं बल्कि हिन्दी है। वह आपको सीखनी होगी और हम तो आपके साथ अपनी भाषामें ही व्यवहार करेंगे।

आप रेलवे और फ़ौजके लिए बेशुमार रुपये खर्च करते हैं, यह हमसे देखा नहीं जाता। हमें उसकी ज़रूरत नहीं मालूम होती। रूसका डर आपको होगा, हमें नहीं है। रूसी आयेंगे तब हम उनसे निबट लेंगे; आप होंगे तो हम दोनों मिलकर उनसे निबट लेंगे। हमें विलायती या यूरोपी कपड़ा नहीं चाहिये। इस देशमें पैदा होनेवाली चीजोंसे ही हम अपना काम चला लेंगे। आपकी एक आँख मैन्चेस्टर पर और दूसरी हम पर रहे, यह अब नहीं पुसायेगा। आपका और हमारा स्वार्थ एक ही है, इस तरह आप बरतेंगे तभी हमारा साथ बना रह सकता है।


  1. * Be a Roman in Rome---रोममें रोमन बनकर रहो।