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मेरी प्रिय कहानियाँ

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मेरी प्रिय कहानियाँ  (1959) 
द्वारा आचार्य चतुरसेन

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मेरी प्रिय कहानियां

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मेरी

प्रिय

कहानियां

डा० धीरेन्द्र वर्मा पुस्तक-संग्रह

आचार्य चतुरसेन



आचार्य जी की अब तक लिखी सैंकड़ों कहानियों में से उनकी अपनी पसन्द की विभिन्न विषयों की तीस उत्कृष्ट कहानियां-प्रत्येक कहानी पर वक्तव्य सहित


रा ज पा ल एण्ड सन्ज़, दिल्ली [  ]









मूल्य:छः रुपये (६.००)

प्रथम संस्करण:फरवरी, १९५९

प्रकाशक: राजपाल एण्ड सन्ज, दिल्लई

मुद्रक:इंडिया प्रिंटर्ज़, दिल्लई [  ]



प्रकाशक की ओर से

कहानी-लेखक जब दस-पन्द्रह कहानियांँ लिख लेता है तो वे पुस्तकाकार में प्रकाशित हो जाती हैं। इस तरह के कितने ही कहानी-संग्रह कहानी-लेखकों के मिल सकते हैं । इन संग्रहों में कला की दृष्टि से सभी स्तरों की कहानियों का समावेश होता है। किन्तु लेखक की कला पूर्ण परिपक्व हो चुकी हो और सैकड़ों कहानियाँ लिख चुका हो, उनमें से वह अपनी पसन्द की कुछ कहानिया छाट दे, उनकी पृष्ठभूमि आदि पर स्वयं प्रकाश डाले, तो ऐसा सकलन पाठक और आलोचक दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण होगा।

प्रस्तुत संकलन 'मेरी प्रिय कहानिया' में आचार्य चतुरसेन को अपनी पसन्द की तीस कहानियां हैं। आचार्य जी ने स्वयं विषयानुसार इनका विभाजन किया है और इनके सम्बन्ध मे टिप्पणियां भी लिखी हैं। हमारे विचार में इस प्रकार के संकलन की उपादेयता निर्विवाद है।

इसी प्रकार अन्य श्रेष्ठ कहानी-लेखकों की प्रिय कहानिया भी प्रकाशित की जा रही है। हमें पूर्ण विश्वास है, इस नए आयोजन का साहित्य-जगत् में अभिनन्दन होगा।

...

[ १० ]
टार्च लाइट १७२
समस्या कहानियाँ १८१-२१४
बाहर और भीतर १८२
ककड़ी की कीमत १८९
कहानी खत्म हो गई १९५
राजनीतिक कहानियां २१५-२४८
लम्बग्रीव २१६
जीवन्मृत २२६
खूनी २४४
रजवाड़ों की कहानियां २४९-२७६
मुहब्बत २५०
राजा साहब की कुतिया २६४
राजा साहब की पतलून २७१
भाव कहानियां २७७-३०४
नहीं २७८
धरती और आसमान २८७
युगलांगुलीय २९४
कौतुक कहानियां ३०५-३२८
पीर नाबालिग ३०६
तिकड़म ३१४
डाक्टर साहब की घड़ी ३२१

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[ ११ ]अम्बपालिका

बौद्ध कहानियां भित्तुराज

PD-icon.svg यह कार्य भारत में सार्वजनिक डोमेन है क्योंकि यह भारत में निर्मित हुआ है और इसकी कॉपीराइट की अवधि समाप्त हो चुकी है। भारत के कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के अनुसार लेखक की मृत्यु के पश्चात् के वर्ष (अर्थात् वर्ष 2022 के अनुसार, 1 जनवरी 1962 से पूर्व के) से गणना करके साठ वर्ष पूर्ण होने पर सभी दस्तावेज सार्वजनिक प्रभावक्षेत्र में आ जाते हैं।

यह कार्य संयुक्त राज्य अमेरिका में भी सार्वजनिक डोमेन में है क्योंकि यह भारत में 1996 में सार्वजनिक प्रभावक्षेत्र में आया था और संयुक्त राज्य अमेरिका में इसका कोई कॉपीराइट पंजीकरण नहीं है (यह भारत के वर्ष 1928 में बर्न समझौते में शामिल होने और 17 यूएससी 104ए की महत्त्वपूर्ण तिथि जनवरी 1, 1996 का संयुक्त प्रभाव है।

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