विकिस्रोत:आज का पाठ/२ सितम्बर

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बिदाई-सम्भाषण बालमुकुंद गुप्त द्वारा २ सितंबर १९०५ ई. में रचित व्यंग्य है, जो नई दिल्ली के दिग्दर्शन चरण जैन द्वारा प्रकाशित शिवशम्भु के चिट्ठे में संकलित है।


"माइ लार्ड! अन्तको आपके शासन-कालका इस देशमें अन्त हो गया। अब आप इस देशसे अलग होते हैं। इस संसारमें सब बातोंका अन्त हैं। इससे आपके शासन-कालका भी अन्त होता, चाहे आपकी एक बारकी कल्पनाके अनुसार आप यहांके चिरस्थायी वाइसराय भी हो जाते। किन्तु इतनी जल्दी वह समय पूरा हो जायगा, ऐसा विचार न आप ही का था, न इस देशके निवासियोंका। इससे जान पड़ता है कि आपके और यहाँके निवासियोंके बीचमें कोई तीसरी शक्ति और भी है, जिसपर यहांवालोंका तो क्या, आपका भी काबू नहीं है।..."(पूरा पढ़ें)