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स्त्रियों की पराधीनता

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स्त्रियों की पराधीनता  (1917) 
द्वारा जॉन स्टुअर्ट मिल, translated by शिवनारायण द्विवेदी
[ आवरण पृष्ठ ]
स्त्रियों की पराधीनता।

इंग्लैंड के प्रसिद्ध तत्त्ववेत्ता

जॉन स्टुअर्ट मिल की विख्यात पुस्तक
"THE SUBJECTION OF WOMEN”

का हिन्दी अनुवाद।

अनुवादक:—

शिवनारायण द्विवेदी ।

प्रकाशक

हरिदास एण्ड कम्पनी

कलकत्ता,

२०१ हरिसन रोड के "नरसिंह प्रेस" में

बाबु रामप्रताप भार्गव द्वारा मुद्रित।

प्रथम बार
मूल्य १०
सन् १८१७ ई०
[ सूक्तियाँ ]
"If slavery is not wrong : nothing is wrong."

Abraham Lincoln.

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If you begin by educating women you must end by emancipating them.

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A man of virtuous soul commands not, nor obeys.
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'No man ever lived a right life who had not been chastened by a woman's love, strengthened by her courage and guided by her discretion.

Ruskin.

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"गुणाः पूजास्थानं गुणिषु न च लिङ्गं न च वयः"

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"तातस्य कूपोयमिति ब्रुवाणा क्षारं जलं कापुरुषा पिवन्ति।"

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"हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः"
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"प्रारभ्यते न खलु विघ्नभयेन नीचैः,
प्रारभ्य विघ्नविहिता विरमन्ति मध्याः।
विघ्नैः पुनः पुनरपि प्रतिहन्यमाना.,
प्रारभ्यमुत्तमजना न परित्यजन्ति॥" (भर्तृहरि)



"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।" (मनु)


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