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अंतर्राष्ट्रीय ज्ञानकोश/चर्चिल, राइट आनरेब्ल विन्स्टन लियोनार्ड स्पेन्सर

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अन्तर्राष्ट्रीय ज्ञानकोश  (1943) 
द्वारा रामनारायण यादवेंदु

[ १०९ ] चर्चिल, राइट आनरेब्ल विन्स्टन लियोनार्ड स्पेन्सर--जन्म ३० नवम्बर सन् १८७४। हैरो तथा सेंडहर्स्ट में शिक्षा पाई। सन् १८९५ में सेना में भर्ती होगये। दो युद्धो में भाग लिया। दक्षिण अफ्रीकी-युद्ध में 'मार्निग् पोस्ट' के युद्ध-संवाददाता रहे। बोअरों ने इन्हे युद्ध-बन्दी बना लिया, लेकिन आप भाग निकले। १९०० में अनुदार-दल की ओर से कॉमन-सभा के सदस्य चुने गये। जोसफ़ चेम्बरलेन की तटकर (टैरिफ) नीति का विरोध किया तथा मुक्त-व्यापार का समर्थन। उदार-दल में शामिल हो

गये। १९०५ मे उपनिवेशो के उपमंत्री नियुक्त किये गये और १९०८ में व्यापार-बोर्ड के अध्यक्ष। सन् १९१२ में आइरिश होम रूल बिल का समर्थन किया। इसके बाद नौसेना विभाग के मंत्री बनाये गये। सन् १९१५ में उन्होने मंत्रि-मण्डल से, मतभेद के कारण, त्यागपत्र दे दिया। फ्रान्स में युद्ध-मोर्चे पर भाग लेने गये। कर्नल' बनकर काम किया। १९१७ में अस्त्र-शस्त्र-विभाग के मंत्री बनाये गये। सन् १९१८-२१ तक युद्ध-मंत्री तथा हवाई- सेना-विभाग के मंत्री रहे। सन् १९२१-२३ मे उपनिवेशों के मंत्री रहे। १९२२ में आयरलैण्ड से हुए समझौते का समर्थन किया। इसके बाद
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वह पक्के बोल्शेविक-विरोधी बन गये। उनके विचारो से उदारदली लिबरली को घृणा होगई। सन् १९२२ में अपने डडी निर्वाचन-क्षेत्र से, इस कारण, चुनाव मे सफल न हो सके। कुछ समय तक क्रियात्मक राजनीति से अलग रहे। युद्ध के संबंध में उन्होंने अपना महान् ग्रन्थ “ससार-सकट” (The World Crisis) लिखा। यह ६ भागों में प्रकाशित हुआ। सन् १९२४ में उन्होंने फिर राजनीति मे प्रवेश किया, अनुदार-दल में शामिल हुए और उसकी और से ऐपिंग् क्षेत्र से पार्लमेट के सदस्य चुने गये। तब से बराबर सदस्य है। बाल्डविन-सरकार मे आप अर्थमंत्री रहे। सन् १९३० से वर्तमान युद्ध के आरम्भ तक उन्होंने मत्रि-मण्डल मे कोई पद ग्रहण नही किया। परन्तु वैदेशिक नीति के सचालन में बहुत दिलचस्पी लेते रहे। इन दिनो के चर्चिल के भाषणो और लेखो की जनता ने बहुत दाद दी और अपनी दूरदर्शिता के लिये तो वह पहले ही नाम पा चुके थे। १९३३ तक वह फ्रान्स के नि: शस्त्रीकरण के विरोधी रहे, किन्तु यह भी कहते रहे कि जर्मनी की शिकायतो को रफा किया जाय। सन् १९३९ मे जर्मनी में नाजीवाद का दौरदौरा होते ही चर्चिल ने कहा कि खबरदार, एक बड़ा खतरा आ रहा है, और उन्होने बरतानिया की सभी खासकर हवाई ताक़त बढ़ाई जाने पर ज़ोर दिया। उन्होने बता दिया कि हिटलर अब मध्य यूरोप मे बढेगा और वह सारी दुनिया

पर छा जाना चाहता है। सन् १९३८ मे आपने ईडन तथा डफ कूपर के साथ म्युनिख समझौते को नामज़ूर किया। सन् १९३९ में युद्ध-मत्रि-मण्डल में चर्चिल नौ-सेना-विभाग के मत्री नियुक्त किये गये। मई १९४० में जब चेम्बरलेन ने त्यागपत्र दे दिया तब आप ब्रिटेन के प्रधान मत्री बने। तब से आप बराबर बड़े धैर्य तथा वीरता के साथ ब्रिटिश-साम्राज्य को जर्मनी तथा इटली और अब जापान के आक्रमणो का मुक़ाबला करने के लिये तैयार कर रहे हैं। किंतु, आपके प्रधान-मन्त्रि-काल मे एक दो दफा हार हुई और इसी कारण आप पर दोबार पार्लमेण्ट मे अविश्वास
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का प्रस्ताव भी आचुका है, पर आपके दल की विजय होती रही है। चर्चिल

एक श्रेष्ठ और प्रभावशाली वक्ता ही नही एक उत्कृष्ट राजनीतिज्ञ और लेखक भी हैं। भारत के आप विकट विरोधियों में हैं। सन् १९३१ मे जब गान्धी-इर्विन समझौता हो रहा था तब आप बहुत बिगड़े थे, और कहा था कि अफसोस है कि एक अधनंगा फ़क़ीर वाइसराय के महल पर चढ़ता है।