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अद्भुत आलाप


ही घोड़ा वहीं रुक जाता है, और ठोंके नहीं लगाता। अतएव उसकी टापों के ठोंकों की संख्या से सही जवाब निकल आता है। यदि मालिक इशारा न करे, तो घोड़ा कभी सही जवाब न दे सके। इस पर अखबारों में बहुत दिन तक वाद-विवाद होता रहा। कितनों ही ने यह सब आस्टिन साहब की बाजीगरी बताई। कितनों ही ने कहा कि यदि आस्टिन साहब के इशारों से भी हंस वे सब काम करता हो, जिनके किए जाने की घोषणा की गई है, तो यह साबित होता है कि और घोड़ों की अपेक्षा वह अधिक बुद्धिमान् है, और उसमें सोचने, समझने, अर्थात् विचार करने की भी शक्ति है।

जमनी में एक जगह एलबरफ़ेल्ड है। यहाँ क्राल नाम के एक धनी रहते हैं। वह बहुत बड़े व्यापारी हैं। विज्ञान से भी आपको प्रेम है। जब उन्होंने हंस की बुद्धिमत्ता की बातें अखबारों में पढ़ीं, तब उन्होंने इस घोड़े को प्रत्यक्ष देखना चाहा। वह आस्टिन के अस्तबल में गए। हंस को उन्होंने देखा, और बड़ी कड़ी परीक्षाएँ लीं। उन्होंने ऐसा प्रबंध किया कि आस्टिन के लिये इशारा देना असंभव हो गया। तिस पर भी हंस ने उनके दिए हुए जोड़, बाक़ी और गुणा आदि के प्रश्नों के सही-सही उत्तर दिए। इस पर काल को विश्वास हो गया कि यह घोड़ा अवश्य ही अलौकिक बुद्धिमान है। उन्होंने कहा कि जिन विज्ञान-शास्त्रियों ने इस घोड़े की बुद्धिमानी क्या, विद्वत्ता में शंका की है, उनकी शंका को मैं निर्मूल