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अद्भुत आलाप


होते हैं, जो सर्दी सहन कर सकें। जो देश उष्ण हैं, उनमें ईश्वर उनके जल-वायु के अनुकूल प्राणी उत्पन्न करता है। इसलिये मंगल और शुक्र पर जो जीव और जो वनस्पति होंगे, वे उनके जल-वायु के अनुकूल होंगे। इस विषय में एक बात ध्यान में रखने योग्य यह है कि प्राणियों की छुटाई-बड़ाई ग्रहों की छुटाई-बड़ाई के अनुसार होनी चाहिए। जो ग्रह जितना बड़ा होगा, उसमें उतनी ही अधिक आकर्षण-शक्ति होगी। आकर्षण-शक्ति उसे कहते हैं, जिसके द्वारा जड़ पदार्थ ग्रहों की ओर खिंच जाते हैं। पृथ्वी पर जो पदार्थ गिरते हुए दिखाई देते हैं, व पृथ्वी की आकर्षण-शक्ति से खिंच आते हैं। इसी खिंच आने को गिरना कहते हैं। इस नियम के कारण बड़े ग्रहों में छोटे जीव नहीं रह सकते, क्योंकि उनमें शक्ति कम होने के कारण वे चल-फिर न सकेंगे, ग्रहों की आकर्षण-शक्ति से खिंचे हुए जहाँ-के-तहाँ ही पड़े रहेंगे। इसीलिये विद्वानों ने यह निश्चय किया है कि बड़े ग्रहों में बड़े और छोटे ग्रहों में छोटे जीवों की बस्ती होगी।

ग्रहों की बस्ती के विषय में अभी इतनी ही बातें जानी गई हैं। आशा है, विद्या और विज्ञान के बल से विद्वान् लोग किसी दिन मंगल और शुक्र आदि के निवासियों के रूप, रंग और आकार इत्यादि का भी पता लगा लेंगे।

जनवरी, १६०३