पृष्ठ:अद्भुत आलाप.djvu/१५८

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अद्भुत आलाप


कर रहा है। इतने में आकाश से ख़ून की वर्षा शुरू हुई। इससे हम लोगों को निश्चय हो गया कि इसने उस लड़के का खून कर डाला। इसके बाद उस लड़के के हाथ-पैर कट-कटकर, खून से भरे हुए, गिरने लगे। कुछ देर में उसका कटा हुआ सिर भी ज़मीन पर आ गिरा। उसके साथ ही उसका धड़ भी धड़ाम से नीचे आया। कुछ मिनट बाद यह मांत्रिक भी आकाश से उतरता हुआ देख पड़ा। खून से भरा हुआ छुरा उसके मुँह में था। इस तमाशे को देखकर देखनेवालों के रोंगटे खड़े हो गए, पर इसके लिये गोया यह कोई बात ही न थी। यह धीरे-धीरे नीचे उतरा, और सुतली को ऊपर से खींचकर इसने उसका पूर्ववत् बंडल बनाया। तब इसने उस लड़के के हाथ, पैर, सिर वग़ैरह को इकट्ठा करके एक चादर के नीचे ढक दिया। जब तक इसने खेलने की चीज़ें वग़ैरह अपने पिटारे में रक्खीं, तब तक वह चादर वैसी ही ढकी रही। जब इसे और कामों से फ़रसत मिली, तब इसने उस चादर को एक झटके से ऊपर खींच लिया। चादर खींचते ही वह लड़का हँसता हुआ उसके भीतर से निकल आया। उसके बदन पर ख़ून का जरा भी निशान न था। यह तमाशा देखकर सब लोग दंग हो गए।"

यहाँ पर हम यह कह देना चाहते हैं कि इस तरह के खेल का हाल लोगों ने अक्सर सुना होगा; क्योंकि अब तक, सुनते हैं, इस तरह के खेल होते हैं । पर स्माइल्स साहब कहते हैं कि उनके मित्र गोरिंग को इस पर विश्वास नहीं आया।