पृष्ठ:अद्भुत आलाप.djvu/६१

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परलोक से प्राप्त हुए पत्र


खबरें भेजनी शुरू की। इस स्त्री को अध्यात्म-विद्या का शौक़ था। वह बहुत अच्छी 'पात्र' थी। उसके शरीर में परलोकगत आत्माएँ प्रवेश करके इस लोकवालों से बातचीत करती थीं। कुछ दिन तक तो इस स्त्री के द्वारा लाट साहब खबरें भेजते रहे। कुछ दिन में एक और स्त्री की 'पात्रता' को उन्होंने पसंद किया। इस विषय में इस स्त्री की शक्ति खूब बढ़ी-चढ़ी थी। सात वर्ष तक लाट साहव की चिट्ठियाँ आती रहीं, और इस नए 'पात्र' के हाथों से लिखी जाती रहीं। लाट साहब के कुटुंब की जिस स्त्री के पास ये पत्र थे, उसने 'ब्रॉड न्यूज़' के संपादक को उन्हें प्रकाशित करने के लिये अनुमति दे दी। इससे वे अब प्रकाशित किए जा रहे हैं। संक्षेप में, उनमें कही गई बातें, सुनिए---

जिन बातो को मैं पृथ्वी पर, पंचभूतात्मक शरीर में रहकर, नहीं जान सका, उन्हें अब मैंने जान लिया है। मैं अब परमानंद में मग्न हूँ। पृथ्वी पर मैं सोया था; अब मैं जाग रहा हूँ। मुझे सख़्त अफ़सोस है, मैंने अपना मानव-जीवन स्वार्थ और बुरी बातों में व्यर्थ खो दिया। अपार दुखों से मेरा जीवन भार-भूत हो गया था। मेरी बुद्धि भ्रष्ट हो गई थी। निराशा मुझ पर छाई हुई थी।

जब मैं पिछली बातें याद करता हूँ, मुझे बड़ा दुःख होता है। मेरी स्वार्थ-बुद्धि बेहद बढ़ी हुई थी। परंतु अब मैं इस लायक़ हो गया हूँ कि पुरानी भूलों का निराकरण कर सकूँ।