पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/११५

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आलम-कलि " रजनी उज्यारी है रहति, जग या ते- नभ, :. ज्वाल, पुंज: अगिनि जरतिः एते मान है। सुधास्नई सीतल है सुभग सरूप जाको, . . सकल संसार जानै ;मु तो ससि भान है। एक परतीति मन श्रावै फयि 'श्रालम से, विनु हरि फछू विपरीति की, उठान है। बिधु गिलि बैठो सु बदन यिधुं चाहै, मेरो, विधु नहीं पाली री विधंतु मर जान है ॥२३२॥ __ . तमीपति तामस२ ते तमिल' है उयो आली, तियनि धनि · · कहँ दनोई. दवतु' है। पापो यरि जातो जो न बेगि वूडौ बारिनिधि, यैरी रवि श्रागं, प्रागे नीरोई. नचतु है। 'आलम' सुकबि राती किरनि सलाका सी है, राका की डरोही राति कहाधी स्रवतु है । चन्द्रिका चितौत तनु चिनगै उठत है री,. __ चाँदनि न होइ चाँद चूनो सो यस्तु है १२३३॥ विस ज्यों वमत यद अंतक सो आयो या ते,.. ., . पंत शिनु अंतक-दसो को गियराती है ।' राती गो पाती वन याती सी घरन लागी, घातो काम ताती के लगाई छेदी छाती है ।... -विधुन- राह । २-तारा-प्रोप तमिल कहा रक्त = साताहै।-यत है - यमर्म फरता है) उगलता है। ६-- दया-त्यु ।