पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/३४

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यातो. न कहत: मुनि यात सूधे गात यौरी, ,, पेम-उतात' यछ और यात पदी है। ___प्यारो पियगड पल विकल पर न फल, , ।। पलक : पलक पुनि प्यारी जोम रदी है। 'बालम' उदास यस रहत उसास लै लै, फछु पदि डाखो कही कौन मात्र पड़ी है। तेरी चितपनि भयो चकित अचेत माई, चेटक-सो आग्यो कछु तूही वित चढ़ी है ॥४॥ . उनकी': विकलताई :देखि : अकुलाई होही, . 1. लागे पड़ी थार समाचार कैसे कै कहीं। तपत उसासाचे पारिन ययारि भावे, हाही.न: ययारि भई सीरी सीरी है यहीं। 'आलम निपट अकुलाये हैं री लाल तुव, रस यस भये अब पाय फर सो गहीं। तजिये बिलम्ब यामैं उनको अकाज होय चलिये कृपालु है के न्यारे कैसे हो सहाँ ४४| कहूँ भूल्यो चेनु कहूँ धाइ गई धेनु कहूँ. . .

आये चित चैनु पहूँ मोरपंख परे है।

मन को हरन को है अहरा छरन को है, '. छाँह ही छुयत छवि छिन है फै छर हैं। १-पेम-उतपात मेम-कलह, मणयमान।-माम : थोक। ३.-पछा-धन्सरा : 13