पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/३९

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यालम-कति हा" . घंघट जवनिका में कारे फारे' केस निसि, .. खुटिला जेराउजरे डीपटि उंजारी है। उघट किलंक. कटि बिकिनी-नूपू वाजे, नैनो नटानायक लकुद लट: धारी है। कहै कवि 'बालम' सुरति विपरीति समैं, .. थंमजल अंजुली · पुहुप- भारि डारी है। अधर . सुरंगभूमि ! नृपति अनंगपागे, नृत्य करे सर कोमोती नृत्यकारी है ॥ ५५ ॥ नैसीये तरलतमधार सो तिमाल बेलि, रही विलि.मिलि अलिगडोरनि के जोर सौ। कईये .ललित, रन्म तारे से, उज्यारे न्यारे, . . , फहूँ: रहे एक है कलिन्दी. छथि छोर सो। कहै कवि 'थालम' किलक हांसी और ध्वनि, सुनिये ना पान वानी, निजु मन्द,सोर सों। कामिनी विलासी कारे कुंजनि में कारे कान्द, जामिनि कहत जाम योस भयो भोर सौ ॥५६॥

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" - - - . . घटसम की ताल । यह ५५ वा उंद बहुत ही उत्तम वक्ति है!..