पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/६३

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थालम-कात जरीये रटति ताकी .जरी ने जुरति कहूँ, जड़ है रहति फिरि जूडियो कहति । 'थालम मुकवि सुधि एकी. ना परत कान्ह, देहि यिफल: किधों" :बिरहा दहति है । सेज ते परति भूमि पैठे ते उठति पुनि, · . ऐसे बहराइ तबपीयहि चहति है। उलटि पलटि लोटि लडकि वपटि जाति,' .. चटपटी लागे: खटपाटियै गहति है ॥११२॥ जायो जु मनोज सिवतीजे नैन ज्याला करि; ...६ .. यहै जोर जुर आयो'तेही ज्याल जरी है । पिरह अपार ताकी" पीर को.न पार पायो, वीर के उपाइ बिनु -पोढ़े पासपरी है। पते पर 'आलमा यसंत यह वैरी भयो, विस सी. ययारि लागे ते.ही विस भरी है। कीर की कलह कलमल्यो"मनु कोकिला कुहकि कुदकि कान कालकान', करी है ॥११३|| प्रीति की परनि चैरी विरह की जीति भई हारे सब जतन जहाँ लौ जानियत है । . घेदन घटे ने विघटी सी.बई जाति 'सेख : ... श्रान आन भाँति उपचार : आनियत है. ! १.-जरी= गड़ी, यूटी, थोपप। २-पोटे पास परो है - घड़ीद कार में पड़ी है। ३. कलकान% परेशान। ..