पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/६५

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बालम केलि " तृहूँ आई हो हूँ आई वाहौ.दौरि प्राति है, - ताकी कौन -गति जाके जरे जीय जरिये । मुरि को गई.ते आई तेऊ इतही को धाई... .जान्यो वैरि विरह, विरोध जाहि डरिये । एती धीरे धीरे 'ऐहैं वने वांगे वीर जैसे, ढोले- पाँइ , धारत उपाइ, कौन करिय:। देखे दुख,तीय के. बिसेपे :मरियो है माई,.. - लेखे नाही पीय के परखें याहि मरियै ॥११७॥ जीय की कहै .न अनमनियै रहति प्यारी, ..। . मनु ठौर नाही सोई नारि और है भई । मुतनु.पसीजे · उर अँसुरन भीजे. छोजे,

- फही कहा कीजै जानो ठग मूरि है दई ।

आलम' सुकवि ढिग हँसति सहेलिनि जो, । ___सपनो सो देख्यो काह, अपनाइ सी लई। वैन की मु-धुनि मुनि नेक ही भरोसा झाँकि, अकल-विकल कछू बावरी सी है गई ॥११॥ कहा की उना और चलहु छचोले पिय इबोली सों, प्रीति यहै, . ..चार पाछे दिन को उदोन है। सो तिय सताई. मैग नैना सित ,असित ते, ... ' . . ., जमुवा बलत जनु सरिता को सोत है। रोनियतमको सचातफा फुछ घ्या ही नहीं है। २-परणे पर एसी को गरम पर।३-अाज विकरा मापना भ्याकुल ।