पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/७४

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स०कोउत्तिसार निरखें नियहि तेई गोरी है कठोरी हम, . 1 चौरीही में चाहे पतझारी केसे पास है। _ 'सेख कहि एक पार फान्हर की खोरि आये। । { ठौर रहै मानमु कठोर 'सोई गात हैं । मोहनी से वोल कारे तारनुको डोल मिली, बोल डोल. दोऊ टमारे वान वात हैं। नैना देखें स्याम के ते वैना कैसे सुनै माई, . बैना' सुने तिनै कैसे नैना देखे जात है ॥१३॥ घर देखै चिन देखे घरीघरी जाइ देखें, . देखियो 'फरत मनु देखि“ना अघानो है। 'श्रालमा,कह हो नबोली गैल लागी डोले, 1. • योलि केचित है याको चितु ललचानो है। . नेकु नैना फेरि कान्ह सैननि ही हँस्यो तघ, गैन थकिठौर चकी मैन हनी' मानो है। धर्मक सी लागो धाइ साल उठो डर प्राइ,. चौकि फिरि चितयो सारु, सरु जानो हैं ॥१४०॥ . मेरो सो न मेरो मनु और कछु भयो जनु, पलक न लागै जागें नैना और है भये । जहाँ हुती तहाँ ठाढ़ी विरह की पीर बाढ़ी, मदन-को श्रागि जागी. रोम रोम हैं. तये ।। १-ठौर रहै मानस - चित्त ठिकाने रहै.। २-कारे तारनु की डोल :- कालो पुतलियों की चंचल' चाल।'-गैन (गमन) गति, चाल । ४स(शर ) चाणा: । -. An A rea