पृष्ठ:ऊषा-अनिरुद्ध.djvu/११४

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धारणा०--अच्छा तू मुझे यह बता कि तू किसका पुत्र है ।

अनि०--महाराज प्रद्युम्न का पुत्र ।

वाणा--कौन प्रद्युम्न इस माखनचोर कृष्णका बेटा प्रद्युम्न?

अनि०--हों, उन योगीराज श्रीकृष्णचन्द्र का बेटा प्रद्युम्न, जिन्होने तेरे मित्र कस को मारकर संसार को दुःखो से बारा था।

वाणा--मेरे सामने उस ग्वाले की इतनी बड़ाई ! भर हाकरे, तूने कहाँ से खीखी है इतनी ढिठाई ?

अनि०--यह निर्भयता मैंने तेरे ही कुना के रत्न मन्त प्रसाद का जीवन-चरित्र पढ़कर सीखी है ।

वाणाo--प्रह्लाद का नाम मेरे सामने लेना बेकार है । हा वैष्णव न था।

अवि०--तो तेरे आगे प्रह्लाद के बाप हिरण्यकशिपु का नाम लूं जिसको स्वयं भगवान विष्णु ने नरसिंह रूप धारण करके सहारा था -

नाम जिन श्रीकृष्ण का संसार में मजबूत है।
यह बली अनिरुद्ध उनके वंश का ही पून है ।।

वाणा०--अरे कौन कृष्ण ! उन्हीं कृष्ण को बड़ाई करता है जो ब्रज की ग्वालनियों के साथ खेले थे ?

अनि०--हाँ, मैं उन्हीं श्रीकृष्ण का वर्णन कर रहा हूं जिनके रासमण्डल में स्वयं भगवान शंकर में आकर नाचे थे।

वाणा०--तब तो दूसरी प्रकार से भी तू मेरा शत्रु है !तू वैष्णव है और मैं वैष्णव संप्रदाय का कट्टर बैरी हूँ।