हितहरिवंश
स्वामी हितहरिवंश का जन्म वैशाख बदी ११ सं॰ १५५९ में देवबंद (सहारनपुर) में हुआ। इनके पिता का नाम हरिराम और माता का तारावती था, इनकी स्त्री का नाम रुक्मिणी था। हित हरिवंश जी राधावल्लभ संप्रदाय के संस्थापक थे। ये संस्कृत और हिन्दी के अच्छ कवि थे। इनकी कविता का मुख्य लक्ष्य भक्ति था। हिन्दी में इन्होंने ८४ पद कहे हैं। उनमें से कुछ चुने हुये पद हम नीचे उद्धृत करते हैं:—
ब्रज नव तरुणि कदम्ब मुकुट मणि श्यामा आजु बनी॥
नख सिखलौं अँग अँग माधुरी मोहे श्याम धनी।
यों राजत कवरी गूँथित कच कनक कञ्ज बदनी॥
चिकुर चन्द्रिकनि बीच अरध विधु मानहुँ ग्रसत फनी।
सौभग रस सिर स्रवत पनारी पिय सीमंत ठनी॥
भृकुटि काम कोदंड नैन सर कज्जल रेख अनी॥
तरल तिलक ताटंक गंड पर नासा जलज मनी।
दसन कुन्द सरसाधर पल्लव पीतम मन समनी॥
चिबुक मध्य अति चारु सहज सखि साँवल विन्दु कनी।
पीतम प्रान रतन संपुट कुच कंचुकि कसित तनी॥
भुज मृनाल बल हरत वलय जुत परस सरस स्त्रावनी।
श्याम सीस तरु मनु मिडवारी रची रुचिर रवनीत॥
नाभि गंभीर मीन मोहन मन खेलन कौ हृदिनी।
कृश कटि पृथु नितंब किकिन व्रत कदलि खंभ जघनी॥
पद अंबुज जावक युत भूषन पीतम उर अवनी।
नव नव भाय विलोम भामइभ बिहरत बर करनी॥
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