पृष्ठ:कवि-प्रिया.djvu/११६

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( १०१ ) तड़ाग वर्णन दोहा ललित लहर, खग, पुहुप, पशु, सुरभि, समीर, तमाल । करभकेलि, पंथी प्रकट, जलचर वरणहुँ ताल ॥१६॥ ताल का वर्णन करते समय सुन्दर लहरें, जल-पक्षी, पुष्प, जलपशु, सुन्दर सुगन्धितवायु, तमाल आदि वृक्षो, हाथियो के बच्चो की क्रीड़ा, यात्रियो वथा जलचरो का वर्णन कीजिए। उदाहरण कवित्त आपु धरै मल औरनि केशव निर्मलगात करें चहुओरें। पंथिन के परिताप हरै हठि, जे तरुतूल तनोरुह तोरें ।। दुखहु एक स्वभाव बड़ो, बड़भाग तड़ागान को बित थौरे । ज्यावत जीवनिहारिनिको, निज बंधनकै जगबंधन छोड़े ॥१७॥ ___ 'केशवदास' कहते है कि तालाब दूसरो का मल स्वय लेकर, चारो ओर के जीवो को निर्मल गात (स्वच्छशरीर वाला) बना देते है । जो पथिक किनारे के पेड़ और उनकी शाखाओ को हठपूर्वक तोडते है, उनके दुःखो को भी दूर करते है । (उन्हे भी निर्मलजल मे स्नान करा कर स्वस्थ बनाते हैं)। इन बड़भागी तालाबो के सुन्दर स्वभाव को देखो कि वे अपने थोडे से धन से, अपने जीवन (जल) को हरने वाले को भी जिलाते हैं और अपने बन्धन से ससार के बन्धन को दूर करते हैं अर्थात् बाँध आदि अपने ऊपर बँधवा कर स्वय तो बधन मे पडते हैं और उससे ससार के लोगो को जो पार करने मे रुकावट होती है, उसे दूर करते हैं अथवा पुराणो के अनुसार तालाबादि पर बाँध बाधने वालो को मुक्ति प्रदान करते हैं।