पृष्ठ:कवि-प्रिया.djvu/१७३

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( १५८ )
उदाहरण
सवैया

केशव प्रात बड़ेही बिदाकहें आये प्रियापहें नेह नहेरी । आवों महावनह जु कहौ,हॅसि बोल द्वै ऐसे बनाय कहेरी ॥ को प्रतिउत्तर देइ सखी सुनि, लोलविलोचन यो उमहेरी । सौहक कै हरि हार रहे अधिरातिके लौ असुवा नरहेरी॥१०॥ बडे प्रातः काल केशव ( श्रीकृष्ण ), प्रेम मे भरे हुए, अपनी प्रिया ( राधा) के पास बिदा मागने के लिए आये और जैसे ही, हॅसते हुए, बाते बनाकर, बोले कि 'मैं महावन हो आऊँ'। वैसे ही, हे सखी। उत्तर कौन देता। उसकी आँखो मे तो इतने आँसू उमड आये कि आधी रात तक न रुके और कृष्ण शपथ खा खाकर ( कि मैं न जाऊँगा ) थक गये।

३–वैर्याक्षेप (दोहा)

कारज करि कहिये वचन, काज निवारन अर्थ । धीरज को आक्षेप यह, बरणत बुद्धि समर्थ ॥११॥ कार्य को रोकने के लिए, जहाँ सकारण बात कही जाय, वहाँ बुद्धि- मान लोग, उसे धैर्याक्षेप कहते हे ।

उदाहरण
कवित्त

चलत चलत दिन बहुत व्यतीत भये, सकुचत कत चित चलत चलाये ही। जात है ते कहौ कहा नाहिनै मिलत पानि, ___जानि यह छांडौ मोह बढ़त बढ़ाये ही। मेरी सौ तुमहि हरि रहियौ सुखहि सुख, मोहूँ है तिहारी सौह रहौ सुख पाये ही। चलेही बनत जो तो चलिये चतुर प्रिय,, सोवत ही जैयो छॉडि जागौगीहौ आये ही ॥१२॥