पृष्ठ:कवि-प्रिया.djvu/२९५

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


( २७७ ) उदाहरण सवैया भूषितदेह विभूति, दिगम्बर, नाहिंन अम्बर अंग नवीनो। दूरिकै सुन्दर सुन्दरी केशव, दौरी दरीन मे मन्दिर कीनो॥ देखि विमडित दडिनसों, मुजदंड दुवो असि दण्ड विहीनो । राजनि श्रीरघुनाथ के राज, कुमण्डल छोड़ि कमण्डल लीनो ॥३४॥ उनके शरीर विभूति । भस्म ) से भूषित ( सुशोभित । है । वह दिगम्बर है और उनके शरीर पर नये वस्त्र नहीं है । 'केशवदास' कहते है कि सुन्दरी स्त्रियो को छोडकर उन्होने दौड कर पहाडो की गुफाओ मे घर बनाया है। उनके भुजदण्ड दण्डियो ( सन्यासियो) के दण्डो से सुशोभित है और दोनो दण्डो अर्थात् तलवार तथा राजदण्ड से विहीन है । श्री रघुनाथ जी के राज्य मे, राजाओ ने पृथ्वी मण्डल को छोडकर कमण्डल ले लिया है अर्थात् सन्यासी हो गय है। १६-निर्णयोपमा दोहा उपमा अरु उपमेय को, जहँ गुण दोष विचार । निर्णय उपमा होत तह, सब उपमनि को सार ॥३५॥ जहाँ उपमान के दोषो पर तथा उपमेय के गुणो पर विचार करके, समता दी जाती है, वहाँ निर्णयोपमा होती है, जो सब उपमाओ का सार है। . उदाहरण कवित्त एकै कहै अमल कमल मुख सीता जू को, एकै कहै चन्द्र सम आनंद को कंदरी।