पृष्ठ:कवि-प्रिया.djvu/३३७

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( ३१९ ) जब अंग अवदात जात बन तातन स्यों, कही कौन कुन्ती मात बात नेह नव सों। बाम ग्राम दूरि करि, देव काम पूरि करि, मोहे राम कौन सों संग्राम कुशलव सों ॥५६।। बाराह भगवान् ने, धर्म के लिए, धीरज धारण करके किसको पारण किया? श्री बलदेव जी ने, किससे बडे वेग से सूत को मारा ? 'केशवदास' कहते है कि जगदीश अर्थात् भगवान से सारा ससार क्या मांगता है ? 'रामायण' को किसने शुभ राग से गाया था ? जब श्रेष्ट अग वाले (युधिष्ठिर ) वन भाइयो सहित को जाने लगे थे, तव माता कुन्ती ने प्रेम पूर्वक कौन सी बात कही थी? अपनी स्त्री सीता को निकालकर, देवताओ कार्य पूर्ण करके, श्रीरामचन्द्र जी किनके द्वारा भूछित किए गए थे? इन सबका उत्तर है 'कुशलवसो [ इसमे भी पहले उदाहरण की तरह प्रहले 'कु' शब्द लीजिये तो वह पहले प्रश्न का उत्तर होगा अर्थात् वाराह भगवान् ने कु' अर्थात् पृथ्वी को धारण किया। फिर इसमे दूसरा अक्षर श' जोडिये तो 'कुश' बना, जो दूसरे प्रश्न का उत्तर हुआ अर्थात् श्री बलदेव जी ने सूत को 'कुश' से मारा। इसी प्रकार कुशलव' 'कुशल वसो' ( कुशल से रहो), और 'कुश लव सो' अर्थात् कुश और लव के साथ ये उत्तर क्रम से बनते है। व्यस्त गतागत उत्तर वर्णन दोहा एक एक वजि वरण को, युग युग वरण विचारि। उत्तर व्यस्त गतागतनि, एक समस्त निहारि ॥५७।। जब उत्तर के पहले दो अक्षर लेकर, आगे का एक एक अक्षर छाड़ते हुए अर्थ निकलता है, तब उसे 'व्यस्त' तथा उसी, को