पृष्ठ:कवि-प्रिया.djvu/३५२

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चरणगुप्त (१) मैं ग र सवि र | ति व nohar aign p - रसवि - An444 जत अतिस सभेव। धु तिब ससर गपग तिअति मतिदे नवम AAAAAA 44444 वररण रणनि रुचिली रणसु चितह तनम भ गटप्र नमति