पृष्ठ:कवि-प्रिया.djvu/६१

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है
( ४७ )

( ४७ ) शरीर के रोयो सहित शिर के बालो को श्वेत होता हुआ देखकर 'केशव' ने उनका यो वर्णन किया है। ये सफेद बाल है या आयु की समाप्ति के अकुर है अथवा शूल हैं, जिन्होने सारे सुखो को समूल नष्ट कर दिया है । अथवा जरारूपो कुरूप राजा ने रूप ( सुन्दरता ) से चादी के पानी से पराजय का पत्र लिखा लिया है, ( जिससे ये सफेदबाल सफेद-सफेद अक्षर हैं ) या जरा (बुढापे ) से बाणो ने जीव को चारो ओर से घेर लिया है अथवा मृत्यु ने जीव को जरी का कम्बल उढा दिया है। सवैया अभिराम सचिम्फन श्याम, सुगंधके धामहुते जे सुभाइकके । प्रतिकूल सबै हगशूल भये, किधौ शाल शृगारके घाइकके ॥ निजदूत अभूत जरा के किधी, अफताली जरा जनलाइकके । सितकेश हिये यहि वेश लौ, जनु साइक अंतकनाइकके ॥१४॥ ___जो बालसुन्दर, चिकने, काले सुगध के सुन्दर घर थे, वे सन अब उलटे आखो के शूल (दुख देने वाले) हो गये हैं । ये सफेद बाल है या शृगार (शोभा) को नष्ट करने वाले के हाथ के शाल (अस्त्र विशेष) हैं । अथवा ये सफेद बाल बुढापे के अद्भुत दूत है या वृद्धावस्था के योग्य अधिकारी है। ये सफेद बाल ऐसे ज्ञात होते है मानो यमराज के बाण हों। ___सवैया लसै सितकेश शरीर सबै कि जरा जस रूपके पानी लिखायो। सुरूपको देश उदासकै कीलनि कीलितु कैकै कुरूप नसायो। जरै किंधौ केशव व्याधिनिकी, किधौ आधि के अंकुर अंत न पायो। जरा शरपंजर जीव जल्यो, कि जुरा जरकबर सो पहिरायो ॥१५॥ शरीर भर मे सफेद बाल है या बुढापे ने चादी के पानी से अपनी कोर्ति लिखा ली है। (ये बाल मानो उसके अक्षर है)। अथवा कुरूप ने सौन्दर्य के देश को उद्दासन मत्र की कीलो को गाड़