पृष्ठ:कवि-प्रिया.djvu/६३

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( ४६ ) करके ऊपर उड़ा दिया, जिसने जाकर बादलो को जलाना आरम्भ किया। उनके अग की सुवास से रोचन बनाया और केतकी तथा चपक पुष्पो मे भी सुगध भर दी। इसके बाद गौरी जी के शरीर का मैल लेकर सोने से करहार (कमल का बीज कोश) तक का निर्माण किया। श्याम वर्णन दोहा विन्ध्य, वृक्ष, आकाश, असि, अरजुन, खंजन सांप। नीलकठ को, कंठ शनि, व्यास, विसासी, पाप ॥२०॥ विन्ध्य पर्वत, वृक्ष, आकाश, तलवार, अर्जुन, खजन साँप, श्रीमहादेव जी का कठ, शनि, व्यास, विश्वासघाती और पाप। राकस, अगर, लॅगूर मुख, राहु, छाह, मद, रोर । रामचन्द्र, घन, द्रौपदी, सिघु, असुर, तम, चोर ॥२१॥ राक्षस, अगरु, लगूर का मुख, राहु छाया, मद ( नशा ) रोर ( दरिद ) श्रीरामचन्द्र, बादल, द्रौपदी, समुद्र की मूर्ति, अधकार और चोर। जंबू जमुना, तैल, तिल खलमन सरसिज, चीर । भील, करी, वन, नरक, मसि, मृगदम, कज्जल नीर ॥२२॥ जामुन फल, यमुना, तेल, तिल, सरसिज, (नीला कमल ), चीर { एक तरह का वस्त्र जो गहरा नीला होता है ), झील, करी ( हाथी) बन, नर्क, मसि ( स्याही ), मृगगद ( कस्तूरी ) और काजल मिला आँसू । मधुप, निशा, श्रृंगाररस, काली, कृत्या, कोल । अपयश, ऋक्ष, कलक, कलि, लोचन, तारे लोल ॥२३॥ भौंरा रात शृंगार रस, काली देवी, कृत्याशक्ति, कोल ( सूअर) अपयश, रीछ कलक, कलियुग, और आँखो के चचल तारे । फा०३