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कोड स्वराज

विचारित ऐतिहासिक कहानियों के साथ, गांधी के दर्शन की समझ के साथ, और हमारी आधुनिक दुनिया के लिए उनकी शिक्षाओं के आवेदन के साथ।

गांधी के प्रमुख इतिहासकारों में से एक प्रोफेसर सुधीर चंद्रा ने हमारी चुनौतियों को संक्षेप में प्रस्तुत किया। उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे दिल्ली के सड़कों का नाम ऐतिहासिक घटनाओं और व्यक्तियों के नाम पर रखा गया था और अब वर्तमान घटनाओं के आधार पर उनका नाम बदलने का चलन चल रहा है। प्रोफेसर चंद्रा इस चलन को “वर्तमान को संजोये ने वाला समाज (the society for the preservation of the present)” कहा। उन्होंने कहा कि हमें अपने इतिहास को प्राथमिक विद्यालय के छात्र की तरह नहीं देखना चाहिए, जिसे दिन के अभ्यास के बाद मिटा दिया जाता है। हमें हमारे इतिहास को जीवित रखना होगा और इससे सीख लेना होगा।

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दिन के भोजन के समय, करीब की एक कैंटीन में, पूड़ी सब्जी, ढोकला और छाछ का भोजन करने के बाद हम सब आश्रम लौट गए। मुझसे कुछ टिप्पणियां करने को कहा गया और मैंने इसके लिए साहस इकट्ठा किया। इन टिप्पणियों से कुछ भी दर्ज नहीं किया गया। अगले दिन मेरे पास हाथ से लिखे हुए दो पन्नों का एक नोट था। अब मैं अपने घर अमेरिका वापस आ रहा था, इस 17 घंटों की फ्लाइट के दौरान, मैं “कानून का राज” की अवधारण और “हमारी दुनिया में हिंसा” इन दोनों के बीच के संबंध को समझने का प्रयास करने लगा।

वर्ष 1963 में, जॉन एफ कैनेडी, लैटिन अमेरिकी राजनयिकों के एक समूह को संबोधित कर रहे थे, और उन्होंने उन्हें कहा कि “यदि हम शांतिपूर्ण तरीकों से होने वाली क्रांति को असंभव बना दें तो फिर क्रांति के लिये हिं ना ही अवश्यसंभावी होगा”।

जॉन एफ कैनेडी, एक पागल आदमी के हिंसक कत्य से मारे गए थे लेकिन उनके शब्दों को मार्टिन लूथर किंग ने पांच साल बाद दोहराया, जब उन्होंने वियतनाम युद्ध के बारे में बात की थी। मार्टिन लूथर किंग ने कहा कि वियतनाम युद्ध वियतनामी लोगों के खिलाफ हिंसा का एक चौंकाने वाला क्रूर कृत्य था।

उन्होंने यह भी कहा कि यह यद्ध अमेरिकी लड़कों और लड़कियों के खिलाफ भी हिंसा का एक चौंकाने वाला कृत्य था, जिन्हें एक ऐसा युद्ध को लड़ने के लिए तैयार किया गया था,जो उसे ना तो समझ रहे थे, ना ही उसका समर्थन करते थे। किंग ने जोर दिया कि अमेरिकी राज्य में एक अन्य प्रकार की हिंसा की स्थिति है - यह है संयुक्त राज्य अमेरिका में काले पुरूषों और महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा।

किंग ने कहा कि हम कैनेडी की बातों के अर्थ को भूल गए हैं। उन्होंने इसे “मान्यताओं में उग्र क्राति (radical revolution in values)” का नाम दिया। उन्होंने कहा कि यदि हम हमारे समाज में हिंसा के मूल कारणों को संबोधित करते हैं, तो हमें साधन उन्मुख समाज से व्यक्ति उन्मुख समाज में जाना होगा। उन्होंने कहा कि हमें अपनी दुनिया को नया स्वरूप देना होगा।

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