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डॉ.सैम पित्रोदा की टिप्पणियां

कार्ल और मैं पिछले साल 2 अक्टूबर को भारत गए थे। हमारे गांधी आश्रम में एक बड़ा आयोजन था, जहां मैंने लगभग 100 लोगों की एक बैठक बुलाई थी।

हम सभी ने एक दिन इस बात पर विचार करते हुए बिताया कि हम गांधीवादी विचारों को कैसे बाहर ला सकते हैं? हम कैसे घरों, समुदायों, शहरों, राज्यों, देशों, और देशों के बीच अहिंसा की बाते फैला सकते हैं?

दर्भाग्य से, दनिया में, अहिंसा पर शायद ही कोई संस्था हैं। मेज पर शांति की चर्चा करने वाले सभी लोग मूल रूप से सैन्यबल से हैं। अहिंसा में उनकी कोई रुचि नहीं है। अहिंसा कभी भी सिखायी नहीं जाती है।

मैं शिकागो मे रहता हूं। मैं 53 वर्षों से शिकागो में रह रहा हूं। मैं, आपको बता दें कि सारी तकनीक और संपदा, सभी विशेषज्ञता के साथ, शिकागो 53 वर्षों में बिल्कुल भी नहीं बदला है। शिकागो में हर तरफ, पहले से कहीं ज्यादा गोलीबारी होती है।

इस सबके पीछे कोई भी कारण नहीं है।

आप यह जानकर हैरान होंगे कि अमेरिका में, आबादी के लगभग एक प्रतिशत लोग जेल में है। प्रति सैकड़ों के हिसाब से देखा जाय तो सबसे ज्यादा संख्या में कैदी अमेरिका में है। मुझे बताया गया है कि विश्व औसत के हिसाब से, प्रति हजार में एक व्यक्ति कैदी है जब कि अमेरिका में प्रति सौ व्यक्ति में से एक कैदी है, जो हमारी सोच से परे है।

मुझे लगता है कि सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से जो भी आज हम करते हैं उसके ज्ञान को, बड़े स्तर पर प्रसार करने की आवश्यकता है। उन्हें सही साधन से लैस करें, और यहां हम। यही करने का प्रयास कर रहे हैं।

भारत से 5,00,000 किताबें लेना और इसे इंटरनेट आर्काइव पर ड़ालना एक बड़ा काम है। मुझे पता है कि गुजराती, बांगला, ओड़िया, तमिल, हिंदी में भारतीय भाषाओं में कई महान किताबें हैं, जो दुनिया के पाठकों को पढ़ने के लिए नहीं मिल पाती हैं।

उन्हें यह भी पता नहीं है कि यह साहित्य सार्थक है। हर बार जब लोग साहित्य के बारे में। बात करते हैं, तो यह केवल अंग्रेजी साहित्य के बारे में ही होती है। तमिल साहित्य के बारे में तो कोई सोचता भी नहीं है।

दो महीने पहले, मैं अपने एक दोस्त से मिला। उन्होंने कहा कि उन्होंने तमिलनाडु के पुस्तकालय में एक किताब देखी, जो 600 वर्ष पुरानी थी, जहां उन्होंने बच्चे के पालन-पोषण पर एक अध्याय पढ़ा। उन्होंने कहा कि यदि मैं उस अध्याय का अनुवाद आज अंग्रेजी में करूं तो आज के सभी डाक्टर अचम्भित हो जायेंगे, लेकिन किसी तरह यह साहित्य खो गया है क्योंकि यह स्थानीय भाषा में है।

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