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डॉ.सैम पित्रोदा की टिप्पणियां

भारत के राष्ट्रीय डाटाबेस की उतनी परवाह नहीं है। हां, यह बहुत महत्वपूर्ण है, मैं यह नहीं कहता कि यह जरूरी नहीं है। लेकिन मैं जिला स्तर पर काम करना चाहता हूं। यदि जिला स्तर पर मुझे 500 अध्यापकों की जरूरत है, तो मुझे दिल्ली जाकर यह पूछने की जरूरत नहीं होनी चाहिए, “मैं उनकी नियुक्ति कहां से करें?” मुझे उन्हें उसी वक्त नियुक्त करना है।

हमें बड़े स्तर पर विकेंद्रीकरण करने की जरूरत है। आज भारत में सत्ता दो लोगों के पास है, प्रधान मंत्री और मुख्य मंत्री।

आज सुबह मेरी मीटिंग बैंगलोर के मेयर के साथ थी, और मैंने कहा, “पहली बात तो यह कि हमें मेयर को और ज्यादा पावर देना चाहिए।” भारत में मेयर के पास कोई अधिकार नहीं होता है। कोई नहीं जानता की मेयर कौन है। वे सिर्फ एक साल के लिए मेयर होते हैं। सुनने में थोड़ा अजीब लगता है। एक साल में तो यह भी पता नहीं चलता कि बाथरूम कहां है। आपको पता लगाने में तीन से चार साल लगते हैं कि आपका काम क्या है। यह एक साल वाली नीति के पीछे कारण यह है कि हम आपको चीजों को समझने के लिए समय नहीं देते हैं। हम सिर्फ वही कर सकते हैं, जो हम कर रहे हैं और इसलिये सभी चीजें ऐसी हैं। इसलिए मैंने उनसे यह कहा कि मेयर का कार्यकाल पांच वर्ष के लिए निश्चित किया जाए, इसके लिए प्रयास किया जाना चाहिए। जिले में भी यही बात लागू होती है। जिला प्रमुख कौन है? जिलाधीश। जिला स्तर पर कोई निर्वाचित सदस्य नहीं होता। शक्ति का वास्तव में विकेंद्रीकरण करने के लिए जो कुछ भी आप कर रहे हों उसके माध्यम से हम जिला स्तर विकास मॉडल को क्यों नहीं अपनाते हैं?

मैं आपका ज्यादा समय नहीं लूंगा, लेकिन मेरे पास कई सुझाव हैं, जो मैं आपसे साझा करना चाहता हूं, मैं आपसे जुड़ा रहना चाहता हूँ। आप जो कर रहे हैं उस पर मुझे बहुत गर्व है। मैं आपकी सहायता करना चाहता हूं। मैं यह जानता और पहचानता हूं कि मैं बीता हुआ कल हूँ, मैं इसका सम्मान करता हूं, लेकिन मैं फिर भी काम करना चाहता हूँ और व्यस्त रहना चाहता हूं। मेरा दिन सुबह 8 बजे शुरू होता है और मैं शनिवार, रविवार हर दिन 11, 12 बजे रात तक काम करता है, क्योंकि मैं जानता हूं कि यह कैसे किया जाता है। मैं कभी छुट्टी नहीं लेता, मैंने पिछले 50 वर्ष में छुट्टी नहीं ली हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि यहां भारत में बहुत काम है। समुद्र तट पर जाकर शराब पीने से अच्छा है, काम में व्यस्त रहना है। छुट्टियां लेना मुझे पसंद नहीं है।

रविवार दोपहर आप सभी से मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा। और मुझे बहुत अच्छा लगा कि आप रविवार दोपहर यहां आएं, क्योंकि यही समय मेरे लिये उपलब्ध था। इसलिए मैंने कार्ल को कहा, जो मेरा दोस्त है और एक दिलचस्प व्यक्ति है। मुझे नहीं मालूम कि आप कार्ल को जानते हैं या नहीं, लेकिन आपको उन्हें गुगल पर सर्च करना चाहिए। कार्ल मेरा बहुत करीबी मित्र है, और वह और मैं सभी तरह की जुनूनी चीजें करते रहते हैं।

हमने हाल ही मैं ब्रिउस्टर काहे के साथ, सेन फ्रेनसिस्को में एक इंटरनेट आर्काइव शुरु की है, जहां हमने भारत की 4.5 लाख किताबों को नेट पर डाला है। भारत सरकार ने घबरा कर कहा, “रुकिये, आप यह कैसे कर सकते हैं? यह अभी भी कॉपीराइट के अधीन है।” हमने कहा, “चिंता न करें। जब वे हम पर मुकदमा करेंगे तब हम निर्णय लेंगे कि हम क्या करें।”

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