पृष्ठ:गल्प समुच्चय.djvu/२५६

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मुस्कान

लखनऊ को, जहाँ सुशीला का मायका था, गुणसुन्दरी के बुलाने के लिये तार भेज दिया। तीसरे दिन ही गुणसुन्दरी अपने भाई के साथ आ गई।

पतिव्रता स्त्री की उपलब्धि जिस प्रकार पति के लिये परम सौभाग्य का विषय है, एकान्त अनुरक्त पति की प्राप्ति भी पत्नी के लिये पूर्वकृत पुण्य-पुञ्ज की उतनी ही मधुर भेंट है।

(२)

गुणसुन्दरी सुशीला की कनिष्टा सहोदरा है। वह उससे ३ वर्ष छोटी है अर्थात् इस समय उसकी अवस्था १७ वर्ष की है। गुणसुन्दरी ने आते ही घर की व्यवस्था के समस्त नियमों का ज्ञान प्राप्त कर लिया और उन्हीं के अनुसार वह सुचारुरूप से गृहस्थी का विधान करने लगी। उसने आते ही सुशीला को एकान्त विश्राम का अवसर दे दिया और गृहस्थी की सारी चिन्ता का भार अपने सिर पर ओढ़कर उसने अपनी प्यारी सहोदरा को पूर्ण रूप से निश्चिन्त कर दिया।

गुणसुन्दरी बाल-विधवा है। वह अपने पति के पर्य्यंक पर केवल एक बार ही पौढ़ी थी और उसके उपरान्त ही, आज ४ वर्ष हुए, उसका सौभाग्य-सिन्दूर दुर्भाग्य के कठोर विधान से पुँछ गया। तब से गुणसुन्दरी अपने पिता के ही घर पर रहती है। उसके पिता प्रकाण्ड विद्वान् हैं और उन्होंने भली-भाँति यह जान लिया था कि विधवा गुणसुन्दरी के तपोमय जीवन की मृदुल