पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/३२४

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उर्दू-अखबार है। दो चार ग्वब धड़ाकेके आर्टिकल इसकी गत संख्याओंमें निकल गये हैं। उसके कोई कोई प्रबन्ध बहुत लम्बे होने पर भी बहुत माफ होते हैं। अच्छी भाषा भी बहुत जरूरी चीज है। यह कागज उत्तम भाषा लिखता है और उसे पाक साफ रग्बनेकी चेष्टा करता है । इमी एक गुणके लिये उसका बना रहना बहुत जरूरी है । पर इसके लेख प्रायः एकही ढङ्ग के होते हैं, उसमें बहुत विषयोंका ममावेश नहीं होता। इसके सिवा सम्पादककी निगाह कुछ अधिक ऊंची है, जिससे खुदपसन्दीमी जाहिर होती है। अच्छी भापा लिखना अच्छी बात है, पर वह खुदपसन्दीके बिना भी लिग्बी जा सकती है। अच्छा काम करनेवालोंको हृदयमें संकीर्णता नहीं रखना चाहिये, उससे उन्नतिमें बाधा पड़ती है। इसके सिवा “काश्मीरदर्पण" नामका एक उदृ-पत्र प्रयागसे निकलता है। जिसमें ३२ पृष्ठ उट्ट और १६ पृष्ठ हिन्दी प्रवन्धोंके रहते हैं। इसकेसम्पादक पं० तेजबहादुर मपा एम० ए० हैं । मेरठसे “अमरेजदीद" नामका एक मासिकपत्र निकलता है। उसके सम्पादक भी एक मुसल- मान वी० ए० वकील हैं । उसमें मुसलमानोंक सामाजिक सुधारकी ओर अधिक दृष्टि रखी जाती है। उसकी भाषा बहुत रूग्बी और फीकी होती है। यह सब पत्र एक-एक सालसे जारी हुए हैं । और भी कई एक मासिकपत्र उदृ में निकलते हैं। उनके सम्पादक भी प्रायः एम० ए०, बी० ए हैं । इतने पत्रों से दो चारके अवश्यही अच्छे ढङ्गसे चल जानेकी आशा की जा सकती है। हिन्दीवालोंके यह बात ध्यान देनेके योग्य है। ___ कई एक उर्दू मासिक-पत्र धर्म सम्बन्धी हैं, जिनमेंसे कुछ मुसल- मानोंके धर्म सम्बन्धी और कुछ हिन्दुओंके हैं। इनमेंसे झझरका "भारत प्रताप” नामक मासिक पत्र विशेष वर्णनके योग्य है। उसे पण्डित दीनदयालु शर्माके छोटे भाई पण्डित विश्वम्भरदयालुजी निकालते हैं । [ ३०७ ]