पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/३३९

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


गुप्त-निबन्धावली संवाद-पत्रोंका इतिहास सम्पादन छोड़ दिया तो उनकी कविता भी बन्द हो गई और अखबारका रंगढंग भी और तरहका हो गया। कविताका उस समय यहां तक जोर था कि कविवचनसुधाके मूल्य आदिके नियम भी कविताहीमें छपते थे। नियमोंकी कविता इस प्रकार थी:- पट मुद्रा पहिले दिये बरस बिताये सात । साथ चन्द्रिकाके लिये दसमें दोउ मिलि जात । बरन गए बारह लगत दोके दो महसूल । अलग चन्द्रिका सात, पट वचन सुधासमतूल ।। दो आना इक पत्रको टका पोसटेज साथ । सारध आना आठ दे लहत चन्द्रिका हाथ ।। प्रतिपंगति आना जुगल जो कोउ नोटिस देइ । जो विशेप जानन चहै पूछि सबै कुछ लेइ । पहले लेखमें कह चुके हैं कि हमारे महाराज एडवर्ड जब प्रिन्स आफ वेल्सकी हैसियितसे भारतवर्ष पधारे थे, उस समय हरिश्चन्द्रजीने उनके स्वागतके लिये बड़ी धूमधाम की थी। उस धूमधामका कुछ परि- चय यहाँ दिया जाता है । उन्होंने कविवचनसुधामें निम्न-लिखित वक्तव्य प्रकाशित किया था। प्रसिद्ध पत्र श्रीमहाराजाधिराजजीके ज्येष्ठ पुत्र युवराज श्रीयुत् महाराज कुमार प्रिन्स आफ वेल्स आगत नवम्बरमें हिन्दुस्तानमें आवेंगे, इसके वर्णनमें सब भाषाके कवियोंकी कविता एकत्र संग्रह करके पुस्तकाकार छापी जायगी। यह सब कविता श्रीमहाराणीके वा कुमारके वा उनके वंशकी कीर्ति वा उनके आशीर्वादमें होगी। संस्कृत, हिन्दी, उर्दू, फारसी, अरबी, बङ्गला, गुजराती, महाराष्ट्री, तामिल, तीलगु इत्यादि सब भाषाकी कविता इसमें सन्निवेशित होसकेगी। कवितामें अत्युक्ति और निरा [ ३२२ ]