पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/३९१

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गुप्त-निबन्धावली संवाद-पत्रोंका इतिहास "विद्यार्थी” नामका एक मासिक पत्र भी संस्कृतमें निकाला था जो कुछ दिन तक निकलता रहा। पं० मोहनलाल विष्णुलाल पंड्याजीने “पृथ्वी- राज रासा" श्रीनाथद्वारे रहनेके समयही छपवाया था। बनारसमें लाजरस कम्पनीके यहां छपकर वह नाथद्वारेसे प्रकाशित होता था। इसके सिवा नाथद्वारेको उक्त मण्डलो एक मासिक दिनचर्या कुछ दिन तक निकालती रही। ___ रियासती अखबारोंमेंसे हमें दो एक ऐसे अखबारोंका और जिक्र करना है जो बहुत पुराने हैं, पर उन्हें बहुत कम लोग जानते हैं। परन्तु उनकी बात फिर कही जायगी। आज अजमेरके हिन्दी अखबारोंकी बात कहते हैं, क्योंकि अजमेर अगरेजी अमलदारीमें होनेपर भी रजवाड़ोंहीमें समझा जाता है। अजमेरके राजस्थान समाचारकी बात हम कह चुके। उसके सिवा “राजस्थान पत्रिका' नामका एक और अखबार हिन्दी भाषामें वहां “राजपूताना मालवा टाइम्स आफिस”से निकला था। कोई एक साल तक चला। भापा अच्छी न होने पर भी उसके लेख अच्छे होते थे। पर राजपूताना मालवा टाइम्सके साथही कोई एक साल चलकर वह समाप्त हो गया। “राजपूताना मालवा टाइम्स" पर जयपुरके परलोकगत दीवान कान्तिचन्द्र मुकर्जीने मानहानिकी नालिश की थी। उसमें उक्त पत्रके सम्पादक और मालिकको जेल हुई और प्रेस आदि सब नीलाम हो गये। एक पत्र अजमेरसे और निकलता है, जो उक्त दोनों पत्रोंसे पुराना है। उसका सताईसवां साल चलता है। उसका नाम है :- राजपूताना गजट असलमें यह पत्र उर्दू है, पर हिन्दी भी थोड़ी बहुत जन्मसेही इसके साथ लगी हुई है। इसके मालिक और एडिटर मौलवी मुराद- अली बीमार थे। 'बीमार' उनका कविताका नाम था। कई साल हुए [ ३७४ ]