पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/५२३

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


गुप्त-निबन्धावली आलोचना-प्रत्यालोचना करता हूं, क्योंकि यह एक स्वाधीनता और पेचीले लेखकको लेखनीसे निकले हैं।" सिजविक साहब नामके एक दूसरे आलोचकके विषयमें वह लिखता है-A Critic whose remarks on questions of men tul philosophy alwaala deserve respectful consideration. यह उसने, अपने आलोचककी प्रशंसा की है जिसका अर्थ है- “वह ऐसा आलोचक है, जिसकी आलोचना मनोविज्ञानके सम्बन्धमें आदरणीय है।” आगे हर्बर्ट स्पेन्सर इस आलोचककी दिखाई अपनी भाषाकी ढिलाई स्वीकार करता है-This apparent inconsist- encs, marked by the italies, would not have existed if, instead of “a cognition of it", I had said, as I ouhto to have sairi, "what we call in cognition of it,"..-इसमें हर्बर्ट स्पेन्सर स्वीकार करता है कि मुझे अपने a cognition of it की जगह what we call :0 Cognition of it कहना उचित था। ऐसा कहनेसे बातका सिलसिला ठीक होजाता । ___ अपने तीसरे आलोचक मार्टिनोको वह An able metaphysi- cian अर्थात् मनोविज्ञानविद् कहकर अपनी भूल मानते हुए कहता है-I admit this to be a telling rejoinder, and one which can be met only when the meanings of the words, as I have used them, are carefully discrimi- nated and the implications of the doctrine fully traced out. ___ "मैं इसे बड़ी प्रभावशाली आलोचना समझता हूं। ऐसी आलोचना तबही हो सकती है, जब मेरो भाषा और मेरा सिद्धान्त बहुत ध्यानसे पढ़ा और विचारा जाय ।” [ ५०६ ]