पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/६४

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हरबर्ट-स्पेन्सर बात करते समय स्वयं अपने रङ्ग रूपकी दिल्लगी किया करते थे। बड़े मिष्ट भाषी और सीधे सादे थे । ___उनके तीन पुत्र और एक कन्या है। वरदाप्रमाद बसु इस समय सारे कारोबारके मालिक हुए हैं । उमर उनकी २० मालसे कुछ ऊपर है । -भारतमित्र १९.ई. हरबर्ट-स्पेन्सर विलायत भी भारतकी भांति विद्वानोंसे खाली होती जाती है। | बहुत कालसे भारत, उन विद्याकी ज्योति फैलानेवाले भूपि मह- पियोंको खो चुका है, जो बनोंमें एकान्त निवास करके विद्या और जानकी आलोचना करते थे, जिन्होंने विशुद्ध ज्ञानके अनुसन्धानमें संसार- की सब चीजोंसे मुंह मोड़कर जंगलों और पर्वतोंकी कन्दराओंमें आयु बिता दी। अब विलायतमें भी वही दशा जारी है। वहाँके सरस्वती- कुमार भी एक एक करके उठते जाते हैं । कई मास हुए, हरबर्ट स्पसर उठ गये ! आप विलायतके एक नामी दार्शनिक थे। संसार इस समय जड़ पदार्थोंकी शोभापर मुग्ध है। रुपयेक सामने इस जमानेमें सब चीज हेच हैं। विद्वान और विद्याका कौन आदर करेगा ? एक विचारशील पुरुषने विलायतकी धन-लोलुपता और स्वार्थान्धतापर दृष्टि करके क्या सुन्दर कहा है, कि अब विलायतमें ग्लाडस्टोन और ब्राइटके आसन पर चेम्बरलेन और ब्राडरिक विराजमान हैं और विद्याके आसनपर किलिङ्ग । विद्वानोंकी ऊँचीसे ऊँची दृष्टि भी पैसेपर है। ___ अभी पायनियरके विलायती संवाददाताकी निन्दा हुई है, कि उसने लार्ड कर्जनकी ४ थी जूनवाली ईटन कालिजकी वक्तृताका अर्थ ठीक नहीं [ ४७ ]