पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१२२

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


चांदी की डिबिया [ अङ्क २ बार्थिविक [ मरौता बढ़ाते हुए ] समाचार पत्रों में निकला था । रसोइयादारिन थी न? मिसेज बार्थिविक नहीं, खिदमतगारिन थी। मैंने लेडी होलीरूड से बातचीत की थी। वह लड़की अपने प्रेमी को मिलने के लिए बुलाया करती थी। बार्थिविक [बेचैनी से] मेरी समझ में उन्हें- मिसेज़ बार्थिविक तुम क्या कहते हो जॉन, और दूसरा रास्ता ही क्या था ? सोचो, दूसरे नौकरों पर क्या असर पड़ता। ११४