पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१२८

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चांदी की डिबिया [अंक २ [ बार्थिविक गिलास को आंखों के पास किए हुए है । वह उसे नीचे करके नाक के पास ले जाता है। मिसेज़ बार्थिविक मुझे उन लोगों से घृणा है जो सच नहीं बोलते। [ बाप और बेटे ग्लास के पीछे से आंखें मिलाते हैं ] सच बोलने में लगता ही क्या है, मुझे तो यह बड़ा अासान मालूम पड़ता है असली बात क्या है, इसका पता ही नहीं चलता । ऐसा मालूम होता है, जैसे कोई हमें बना रहा हो । बार्थिविक [ मानो फैसला सुना रहा हो ] नीची जाते अपने पैरों में श्राप कुल्हाड़ी मारती हैं, अगर हमारे ऊपर भरोसा रक्खें तो उनकी दशा इतनी बुरी न हो। मिसेज़ बार्थिविक लेकिन उस पर भी उन्हें संभालना मुश्किल है । अाज मिसेज़ जोन्स ही को देखो । १२०