पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१३४

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चांदी की डिबिया [अङ्क २. बार्थिविक सच ? स्ना जी हां । कुछ झमेला करना पड़ा । मैंने उससे पूछा कि तुम्हारे घर में यह चीज़ कैसे श्राई । वह मुझे कुछ जवाब न दे सकी । हां बराबर चोरी से इनकार करती रही । इस लिये मैंने उसे गिरफ्तार कर लिया । तब उसका शौहर मुझसे उलझ पड़ा । आखिर मैंने हमला करने के अपराध में उसे भी गिरफ्तार कर लिया। घर से पुलीस स्टेशन तक जाने में वह बहुत गर्म होता रहा-बिल्कुल जामे से बाहर-बार बार श्राप को और श्रापके लड़के को धमकी देता था कि समझ लूँगा । सच पूछिये तो बड़ा फ़ितना निकला। मिसेज़ बार्थिविक बड़ा भारी बदमाश है । १२६