पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१३५

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दृश्य २] चाँदी की डिबिया स्नो हां, मेम साहब, बड़ा ही उजड असामी ! जैक - [ शराब को चुस्की लेता हुश्रा, मज़े में श्राकर ] पाजी का सिर तोड़ दे । स्नो मैंने पता लगाया, पक्का शरावी है। मिसेज़ बार्थिविक मैं तो चाहती हूँ, बचा को कड़ी सजा मिले। स्नो दिल्लगी तो यह कि वह अभी तक यही कहे जाता है कि डिबिया मैंने खुद चुराई । वार्थिविक डिबिया उसने चुराई । १२७