पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१४८

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चांदी की दिबिया [ अङ्क खूब ! और जैक यह बात नहीं है, अम्मा । मुझे यहां श्राने की खूब याद है-मैं ज़रूर आया हूंगा- बार्थिविक गुरसे से बेकाबू होकर, इधर से उधर तक टहलता हुश्रा] वह मनहूस थैली कहां से आगई ! खुदा खैर करे ! ज़रा सोचा तो जैक ! यह सारी बात पत्रों में निकल जायगो । किसी को मालूम था कि मामला यहां तक पहुँचेगा । ' इसले तो यह कहीं अच्छा होता कि एक दर्जन डिबिये खो जाती और हम लोग जवान न खोलते ! [पत्री से] यह सब तुम्हारी करतूत है । मैंने तुमसे पहले ही कह दिया था। अच्छा हो कहीं रोपर आ जाता । मिसेज़ बार्थिविक (तीन स्वर से) मेरी समझ में नहीं आता तुम क्या बक रहे हो, जॉन