पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१५४

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चांदी की सिखिया मिसेन बार्थिविक किसी औरत की? नहीं ! नहीं ! जैक ! ऐसा न कहो । जैक उछल कर] तुम मानती ही नहीं थी तो मैं क्या करता। मैं तो नहीं बताना चाहता था । मेरा क्या कसूर है ? 1.द्वार खुलता है और मारलो एक आदमी को अंदर लाता है अधेड़, कुछ मोटा श्रादमी है। शाम के कपड़े पहने हुए है। मूछे लाल और पतली हैं, श्राले काली और तेज । उसकी भवं चीनियों की सी हैं। मारलो रोपर साहब श्राये हैं हुजूर! [वह कमरे से चला जाता है ] रोपर [ तेज़ आँखों से चारों ओर देख कर ] कैसे मिजाज हैं ? १४६