पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१५६

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चांदी की डिबिया
[ अड़्क २
 

[ वह जैक की तरफ़ हाथ उठाता है, जो ऐसा दबक जाता है मानों वार बचाता हो ]

आप को कभी इसका विश्वास होगा।

[ रोपर हंसता है और उत्तेजित हो कर शब्दों पर ज़ोर देता हुआ ]

यह हँसी की बात नहीं है मैंने जैक का क़िस्सा भी आप से कहा था। आप समझ गए होंगे---बदमाश दोनों चीजें उठा ले गया---वह सत्यानासी थैली भी लेगया। अखबारों में इसकी चर्चा होगी।

रोपर

[ भवें चढ़ाकर ]

हूँ! थैली! बड़े लोगों की दशा? आपके साहबज़ादे क्या कहते हैं?

बार्थिविक

उसे कुछ याद नहीं। ऐसा अंधेर कभी देखा था? पत्रों तक यह बात पहुँचेंगी।

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