पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१५६

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चांदी की डिबिया [अङ्क [वह जैक की तरफ हाथ उठाता है, जो पा दनक नाता है मानों वार बचाता हो । श्राप को कभी इसका विश्वास होगा। [रोपर हंसता है और उत्तेजित हो कर शब्दों पर जोर देता हुआ] यह हँसी की बात नहीं है मैंने जैक का किस्सा भी आप से कहा था। आप समझ गए होंगे- बदमाश दोनी चीजें उठा ले गया-वह सत्यानासी थैली भी लेगया। अखबारों में इसकी चर्चा होगी। रोपर [ भवें चढ़ाकर हूँ ! थैली ! बड़े लोगों की दशा ? आपके साहब जादे क्या कहते हैं? वार्थिविक उसे कुछ याद नहीं। ऐसा अंधेर कभी देखा था? पत्रों तक यह बात पहुँचेंगी ।