पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१५७

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शादी की दिक्खिा मिसेज़ बार्थिविक हाधों से श्रीखों को छिपाकर । नहीं ! नहीं! यह बात तो नहीं हैं- [पार्थिविक और रोपरं घूम कर उसकी ओर देखने हैं ] बार्थिविक उस औरत पर कह रही हैं । वह बात अभी अभी इनके कानों में पड़ी है। [रोपर सिर हिलाता है और मिसेज़ बार्थिविक अपने होंठों को दबाकर मन्द दृष्टि से जैक को देखती है और मेज़ के सामने वैठ जाती है] आखिर, क्या करना चाहिए रोपर ? वह लुखा जोन्स इस थैली वाले मामले को खूब बढ़ा- वेगा, बात का बतंगड़ बनादेगा। मिसेज़ बार्थिविक मुझे विश्वास नहीं आता कि जैक ने थेली ली ।