पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१५८

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चांदी की डिबिया बार्थिविक क्या अब भी कोई संदेह है १ वह औरत अाज सवेरे अपनी थैली मांगने आई थी। मिसेज़ बार्थिविक यहां ? इतनी बेहया है । मुझे क्यों नहीं बताया ? [वह एक दूसरे के चेहरे की तरफ ताकती है, कोई उसे जवाब नहीं देता । समाटा हो जाता है। बार्थिविक . [चौंककर ] . क्या करना होगा, रोपर ? रोपर [धीरे से जैक से] तुमने कुंजी तो दरवाजे में नहीं छोड़ दी थी ? जैक [रुखाई से । हां, छोड़ तो दी थी। १५.