पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१६५

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आनंदी की दिलिया मिसेज बार्थिविक तुमने दरवाज़े में कुंजी लगी हुई छोड़ दो, यही क्वा कम है ? अब और कुछ कहने की ज़रूरत नहीं। [ उसके माथे को प्यार से छुकर । तुम्हारा सिर आज कितना गर्म है ? जैक लेकिन मुझे यह तो बतलाइए कि मुझे करना क्या होगा? [क्रोध से ] मैं नहीं चाहता, कि इस तरह चारों ओर से मुझे दिक करें। [मिसेज़ बार्थिविक उसके पास से हट जाती है।] रोपर [जल्दी से] आप यह सब कुछ भूल जाय। आप तो सोये थे।