पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१६६

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चाँदी की डिबिया
[ अड़्क २
 

जैक

क्या कल मेरा कचहरी जाना जरूरी है?

रोपर

[ सिर हिला कर ]

नहीं।

बार्थिविक

[ ज़रा शान्तचित्त होकर ]

सचमुच!

रोपर

जी हाँ!

बार्थिविक

लेकिन आप तो जायँगे?

रोपर

जी हाँ!

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