पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/२३४

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चांदी की डिविया तुम इसे न्याय कहते हो ? जैक का तो कुछ भी नहीं बिगड़ा? उसने शाराब पी, उसने थैली ली-उसी ने थैली ली लेकिन। जवान दबा कर ] रुपया उसे बचा ले गया। वाह रे इंसाफ ! ठरी में बन्द कर दिया जाता है और स्त्री पुरुषों के मुंह से एक सूखी धीमी पाह निकलती है।] क्या मैजिस्ट्रेट । व हम नाशता करने जाते हैं [वह अपनी जगह से उठता है ] अदालत में हलचल मच जाती है, रोपर उठता है और समाचार यह के सम्बाददाता से बात करता है। जैक सिर उठा कर अकड़ता हुधा बरामदे में चला जाता है। बार्थिविक भी उसके पीछे पीछे जाता है। मिसेज़ जोन्स [विनीत भाव ले उसकी तरफ फिर कर ] हजूर २२६